सम्पादकीय - प्रधान संपादक प्रवीण दत्ता की कलम से।
जैसा कि मैंने तीन दिन पहले लिखा था कि अब जल्द बीमा कंपनियों की कोविड बीमा पॉलिसियों का सच सामने आने लगेगा। लीजिये राजकाज आज आपको बताएगा कि आपकी कोविड पॉलिसी आपको किस किस चीज का पैसा वापस नहीं देगी।
अगर आपने कोरोना की पहली लहर में किसी भी बीमा कंपनी से कोविड प्रोटेक्शन प्लान लिया था तो जान लीजिये कि जब आप अपने इलाज की राशि का क्लेम करेंगे तो आपको पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) का पुनर्भुगतान नहीं मिलेगा। दक्षिण भारत में एक 81 साल के बुज़ुर्ग, जो कि डायबिटिक भी हैं, कूल्हे के फ्रैक्चर के इलाज के लिए, अस्पताल में भर्ती हुए। वहां उनका 8 दिन कोविड का भी इलाज किया गया। जब उन्हौने अपना एक लाख बीस हजार रुपये का क्लेम माँगा तो उन्हें 56,500 का पुनर्भुगतान किया गया। जिन मदों में पैसे काटे गए उनमे 17,600 रुपये पीपीई के थे।
यह कोई एक इकलौता मामला नहीं है। अगर सभी ज्ञात मामलों का औसत निकालें तो मरीजों को 45% से 80% तक पुनर्भुगतान किया जा रहा है। जनरल इश्योरेंस कॉउन्सिल के एक सदस्य का कहना है कि पीपीई के पैसे काटना सरासर गलत है क्योंकि कोई भी अस्पताल कोविड का इलाज बिना पीपीई किट कैसे कर सकता है ? यह कोविड के इलाज की मूल भूत आवश्यकता है। इस समय कॉउन्सिल के पास जितने विवादित केस लंबित हैं उनमे से 70-80% कम पुनर्भुगतान के हैं। एक निजी बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय कोविड मामलों में औसतन 1,40,000 के क्लेम आ रहें हैं और औसतन 95,000 का पुनर्भुगतान किया जा रहा है क्योंकि लगभग 20% पीपीई का खर्चा होता है। भारत की सबसे बड़ी थर्ड पार्टी क्लेम सेटलमेंट कंपनी के अधिकारी ने अस्पतालों के गोलमाल का खुलासा करते हुए बताया कि यदि एक डॉक्टर एक कोविड वार्ड के राउंड पर जाता है है और वहां 15 मरीजों को देखता है तो उन सभी 15 मरीजों के बिल में एक एक पीपीई किट का खर्चा कैसे जोड़ा जा सकता है ? इसी अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी ICU के लिए अलग नियम रखती है और प्रत्येक राउंड के पीपीई किट का खर्चा जोड़ती है। इसी तरह प्रति मरीज कितने CT स्कैन का भुगतान किया जाए यह भी विवाद का विषय है। अस्पताल तो CT स्कैन सिर दर्द की गोली की रफ़्तार से लिख देते हैं।
कुल मिलाकर IRDA को इन मामलों में अस्पतालों को स्पष्ट दिशा निर्देश देने होंगे अन्यथा मरीजों के हितों के साथ ऐसे ही कुठाराघात होता रहेगा।


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