मद्रास हाई कोर्ट के जजों की मौखिक टिप्पणी की मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे चुनाव आयोग को पहले दिन ही निराशा हाथ लगी है। चुनाव आयोग की याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों की मौखिक टिप्पणियों को रिपोर्ट करने से वह मीडिया को नहीं रोक सकता। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करना व्यापक जनहित में है क्योंकि यह जवाबदेही लाती है। 


जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अदालत में क्या हो रहा है ? क्या दिमागी कसरत की जा रही है ? इसके बारे में देश के नागरिक जानना चाहते हैं और इससे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लोगों के विश्वास को बढ़ावा भी मिलता है। जस्टिस शाह ने भी कहा कि कभी-कभी एक के बाद एक आदेश पारित किए जाने के बावजूद संबंधित अथॉरिटी इनका पालन नहीं करती। जमीनी हकीकत के आधार पर ऐसी टिप्पणियां की जाती है और ऐसी टिप्पणियों को सही भावना के साथ लिया जाना चाहिए। आपको बता दें कि शीर्ष कोर्ट चुनाव आयोग की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने मद्रास हाई कोर्ट की टिप्पणियों को चुनौती दी है 



और मांग भी की है कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को प्रकाशित करने पर यानी कि मीडिया रिपोर्टिंग करने पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा है कि आयोग की चिंता को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश जल्द ही पारित किया जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट!