जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

सबसे पहले आप ऊपर दिया गया लिंक क्लिक करके वीडियो देख लीजिये। ना आज किसी बॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं है बल्कि सोमवार रात का राजधानी जयपुर का ही दृश्य है। 

इस वीडियो के शुरू में आप रात की सुनसान सड़क पर एक व्यक्ति को पुलिस की PCR के सहचालक से बात करते देख सकते हैं। आप सोचेंगे कोई अभागा रात को कहीं जा रहा होगा कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की सजग पुलिस ने रोक लिया और पूछताछ कर रही है। पर नहीं ऐसा कुछ नहीं हो रहा।  यह तो तोड़ बट्टा हो रहा है।  पुलिस की PCR जिस तरफ से आई थी रास्ते में उसे एक बजरी से भरा ट्रक दिखा।  किसी कार्यवाही के बजाय PCR में बैठे सजग पुलिसकर्मियों ने निगाह दौड़ाई तो तो जिसे वे ढूढ़ रहे थे वो दिखाई पड़ गया। वो व्यक्ति जिसने बजरी का ट्रक मंगाया था। अब जयपुर कमिश्नरेट की पुलिस है है कोई गाँव देहात की तो है नहीं ।   तरीके से बात हुई और बात बन गई।  PCR सीन से गायब, ट्रक सीन में।  फिर बजरी से भरा ट्रक अपने रास्ते और PCR अपने रास्ते।    

बेशक CM अशोक गहलोत ने आंशिक लॉक डाउन को सख्त लॉक डाउन में बदल दिया हो।  बेशक पुलिस को सख्ती बरतने के निर्देश दे दिए हों। लेकिन CM साहब को शायद पता नहीं है कि एक नंबर की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए जितने जतन वो करते हैं उतने ही जतन दो नंबर की अर्थवयवस्था को चलाने के लिए इसके खिलाडियों को भी करने पड़ते हैं। ये लॉक डाउन - वॉक डाउन सब मिथ्या है, सब खेल माया का है।  और प्रधानमंत्री  देश को आपदा को अवसर बनाने की ऐसी घुट्टी पिलाई है कि जिसका बस चलता है वही आपदा को अवसर बना कर भारत माता के प्रति अपना फर्ज अदा कर देता है।  इस वीडियो में जो भी लोग हैं वे बजरी को लेकर ऐसा कर रहें हैं।  कुछ अति परोपकारी रेमसेडिवीर इंजेक्शन की नक़ल बेचकर कर रहें हैं।  खैर अपने को क्या है।  अपन तो अभी टीवी चालू करते हैं और या तो दो बुरी बात मोदी के कह देंगे या ममता दीदी के लिए नहीं तो राज्य सरकार तो है ही कोसने को।