म्यूकोर माइकोसिस। यानी ब्लैक फंगस!  कोरोना से निजात पाने के बाद डायबिटीज के रोगियों में तेजी से फैल रहा यह भयानक रोग भी अब सरकार के सामने संकट लेकर आया है। कोरोना के हालात से निपटने के लिए जूझ रही राज्य सरकार के सामने इस बीमारी ने कई परेशानियां खड़ी कर दी है।



 प्रदेश में ज्यादा मरीज सामने आने के बाद इसकी भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री से मिले निर्देशों के बाद एसएमएस अस्पताल में इसका अलग से आउटडोर बनाया गया। अलग-अलग विभागों के 11 चिकित्सकों की ड्यूटी भी वहां लगाई गई लेकिन आउटडोर चालू होते ही हालात इस कदर बने कि सभी 25 बेड तुरंत फुल हो गए। ब्लैक फंगस बीमारी की रफ्तार के बीच इसके इलाज में काम आने वाली दवाओं की कीमतों ने भी रफ्तार पकड़ ली। और अब मन चाहे दाम पर निजी मेडिकल स्टोरों पर ये दवाएं बेची जा रही है। हालांकि सरकार ने लगभग ढाई हजार डोज के लिए टेंडर जारी किए हैं लेकिन वह कब आएंगे? कब इलाज होगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं।



 ब्लैक फंगस के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन लाइपोसोमल एम्पोटेरिसिन- बी बाजार में मिल नहीं रहा और कहीं मिल रहा है तो उसके मन चाहे दाम वसूले जा रहे हैं। दवा कंपनियों ने भी इस इंजेक्शन के दाम 70% तक बढ़ा दिए हैं। कोरोना इलाज के लिए काम आ रहे रेमदेसीविर इंजेक्शन के बाद अब ब्लैक फंगस के लिए काम आने वाले! एंटी फंगल इंजेक्शन की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही है। जिन दवाओं की कीमत ब्लैक फंगस बीमारी सामने आने से पहले 400 से ₹500 थी। अब यह 800 से लेकर हजार रुपए तक मिल रही है। यह सब कुछ देखते हुए भी प्रदेश का ड्रग कंट्रोल विभाग अभी तक चुप्पी साधे बैठा है। विभाग के कोई प्रयास सरकारी सिद्ध नहीं हुए हैं। आपको बता दें कि? ब्लैक फंगस के मामले! सबसे ज्यादा कोटा और उसके बाद जयपुर मेंऋ सामने आ रहे हैं। वहीं पाली और सिरोही में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट!