कोरोना से संक्रमित हुए गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने से जान जाने का संकट दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। सरकारी अस्पताल हो या निजी अस्पताल सभी जगह 100% बेड फुल है ऐसे में गंभीर रूप से आ रहे नए मरीजों के लिए अपनी जान देने के अलावा और कोई रास्ता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
ऐसा ही एक वाकया शनिवार को प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल के सामने भी नजर आया, जहां निवाई से आई 25 साल की एक महिला ने देखते ही देखते अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया। उधर निजी अस्पतालों ने भी ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू नहीं होने का आरोप लगाया है। किसी अस्पताल को खपत की तुलना में एक तिहाई ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आ रही है। तो कहीं जरूरत से आधी ही ऑक्सीजन मिल पा रही है। इन परिस्थितियों के बीच मरीजों की सांसो को संभालने की दिशा में कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही है। स्थिति यह हो गई है कि प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। उधर ग्रेटर नगर निगम के उपमहापौर के अनुसार ऐसे मरीज जिनका घर पर इलाज चल रहा है उनको प्रशासन ऑक्सीजन रिफिल की अनुमति मिलनी चाहिए।
कोविड के अलावा कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों मरीजों का घर पर ही इलाज हो रहा है। ऐसे में इन सभी को भी निरंतर ऑक्सीजन की जरूरत है। हालांकि जिला स्तर पर इस बारे में अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उधर केंद्र से प्रदेश में गंभीर हालात को देखते हुए 100 मिट्रिक टन ऑक्सीजन का अतिरिक्त कोटा आवंटित किया गया है। अब राजस्थान को पश्चिम बंगाल के बुर्नपुर और ओडिशा के कलिंगा नगर से इस अतिरिक्त ऑक्सीजन कोटे की आपूर्ति होगी। हालांकि यह सप्लाई राजस्थान पहुंचने में 7 दिन लगेंगे। इसमें पश्चिमी बंगाल से 40 और उड़ीसा से 60 मिट्रिक टन ऑक्सीजन आवंटित की गई है।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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