ब्यूरो रिपोर्ट।
वनस्थली विधापीठ के कुलपति 58 वर्षीय आदित्य शास्त्री ने सोमवार शाम करीब सवा सात बजे अंतिम सांस ली। शास्त्री 5 मई से जयपुर के एक प्राइवेट अस्पताल मे भर्ती थे। एक बार कोरोना पोजीटिव होने के बाद उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। कुलपति शास्त्री का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर वनस्थली विद्यापीठ संस्था में लाया गया तथा कोरोना गाइडलाइन के अनुसार शास्त्री के जेष्ठ पुत्र अंशुमान शास्त्री ने ब्रह्मा मंदिर मोक्ष धाम में वैदिक मंत्र उच्चारण के बाद चिता को मुखाग्नि दी। उनका जन्म 4 जून 1963 मे हुआ था 2003 मे वह वनस्थली विधापीठ के कुलपति बने राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री के पोते व दिवाकर शास्त्री के बेटे आदित्य शास्त्री को महिला शिक्षा की प्रगति के लिए जाना जाता है। वह महिला शिक्षा मे आधुनिक विचारो के समावेश के लिए जीवन भर कार्य करते रहे। वनस्थली विधापीठ के रूप मे 1943 मे पहचान मिली। इसी वर्ष स्नातक की पढाई शुरू हुई और 1983 मे इसे डीम्ड विश्व विधालय का दर्जा प्राप्त हुआ। वनस्थली विधापीठ मे देश विदेश की करीब 15 हजार छात्राए पंचमुखी शिक्षा ग्रहण कर रही है वनस्थली विधापीठ महात्मा गांधी के सपने को साकार कर रहा है यहां सभी बालिकांए वह कर्मचारी खादी के वस्त्र पहनते है वनस्थली विधापीठ मे छात्राओ को घुडधोड से लेकर हवाई जहाज उडाना तक सिखाया जाता है यहा की छात्रांए देश विदेश राजनिति मे हर जगह अपनी पहचान बनाए हुए है आदित्य शास्त्री अपने परिवार मे पत्नी ईना शास्त्री व दो बेटे अंशुमान व ईशान शास्त्री को छोड कर गए।


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