प्रदेश का चिकित्सा महकमा पिछले तीन-चार दिन से भले ही राहत की सांस ले रहा हो। आंकड़ों में निरंतर आ रही कमी को देखकर यह लग रहा हो कि कोरोना की दूसरी लहर का पीक जा रहा है लेकिन जहां पीक है वहां तो विभाग के कारिंदे पहुंच ही नहीं पाए। हम बात कर रहे हैं प्रदेश के सुदूर इलाकों में स्थित गांवों की। जहां इस महामारी ने तांडव मचा दिया है। घर-घर में मौत हुई है, परिवार छिन्न-भिन्न हो गए हैं।



बुजुर्गों के सामने जवान मौतें हो रही है। मेवात इलाका हो या मेवाड़ या फिर शेखावटी। कई संभागों में इस महामारी का भयानक रूप अभी तक नजर आ रहा है। कोरोना संक्रमण के सरकारी आंकड़े भले ही राहत दे रहे हो लेकिन गांवों में मौतों का खौफनाक मंजर सामने दिखाई दे रहा है। इस साल अप्रैल महीने से शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर ने प्रदेश के कई गांवों में ऐसा कोहराम मचाया है और सरकार को उसकी भनक तक भी नहीं लगी। छोटे से गांव में 10 से लेकर 20  लोगों की मौत हो चुकी है। चारों तरफ बेबसी, लाचारी और अपनों के खोने का गम साफ दिखाई दे रहा है। कई गांव में ऐसा भी देखने को सामने आ रहा है



 कि कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद ग्रामीण उसका उपचार कराने के लिए तैयार नहीं है। वहीं कई लोग डर के मारे टेस्ट ही नहीं करा रहे। कई जगह तो सरकारी आंकड़े और वास्तविकता में रात दिन का फर्क दिखाई दे रहा है। कई गांव का यह आलम भी है कि कई लोगों के संक्रमित होने के बावजूद वहां अभी तक कोई चिकित्सा राहत नहीं पहुंची है। वहीं कई जगह अभी सर्वे का काम भी शुरू नहीं हुआ है। राज्य सरकार को ही चाहिए कि ऐसे ही गांव की तुरंत सूची बनाई जाए और वहां आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं शुरू की जाए जिससे कि इस महामारी पर समय रहते कंट्रोल किया जा सके।

ब्यूरो रिपोर्ट