देश के दूरसंचार विभाग यानी डीओटी ने राजस्थान सहित देश के कई प्रदेशों में अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उस बात के लिए है जिसमें यह कहा जा रहा है कि 5G मोबाइल टेस्टिंग के चलते कोरोना तेजी से फैल रहा है। यह मैसेज पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। विभाग ने कहां है कि 5G से कोरोना फैलने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। 


राजस्थान में तो 5G नेटवर्क की कनेक्टिविटी अभी नहीं है। फिर ऐसे मामले क्यों ज्यादा आ रहे हैं? डीओटी ने अलर्ट जारी करने के साथ ही लोगों के भ्रम को दूर करने के लिए एक विकल्प भी दिया है, जिसके जरिए ₹4000 का शुल्क जमा करा कर अपने क्षेत्र में स्थित टावर के रेडिएशन की जांच कराई जा सकेगी। दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक सिद्धार्थ पोखरना का कहना है कि रेडियो तरंगों या मोबाइल रेडिएशन का कोरोना या अन्य कोई वायरस फैलने से कोई संबंध नहीं है।



 महाराष्ट्र और यूपी सहित कुछ राज्यों में सोशल मीडिया के जरिए यह भ्रम फैलाया गया है और राजस्थान सहित कई राज्यों में इस भ्रामक मैसेज से बचने के लिए विभाग अलर्ट जारी कर रहा है। आपको बता दें कि प्रदेश में लगभग 35000 मोबाइल टावर है। वहीं 120000 ट्रांसीवर स्टेशन है। इनमें से डीओटी ने अप्रैल महीने से पहले 45000 बीटीएस की जांच कर ली थी। वही 225 बीटीएस पर रेडिएशन की जांच अप्रैल माह के दौरान ही कर ली गई है।

ब्यूरो रिपोर्ट!