प्रदेश के सैकड़ों लोग तेजी से फैल रही काली और सफेद फंगस महामारी की चपेट में आ रहे हैं। किसी मरीज में व्हाइट फंगस तो किसी में ब्लैक फंगस! इस रोग का निदान करने वाले चिकित्सक भी इसके कई रूपों को देखकर हैरान है। अभी तक यह समझा जा रहा था


 कि कोरोनावायरस के दौरान स्टेरॉयड की मात्रा लेने से ब्लैक फंगस होती है। लेकिन अब कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने स्टेरॉयड लिया ही नहीं और फिर भी इस बीमारी का शिकार हो गए। S.m.s. अस्पताल में ऐसे पोस्ट कोविड- मरीजो मैं भी ब्लैक फंगस की शिकायत पाई गई है, जिनको न तो डायबिटीज है और ना ही स्टेरॉयड या ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया है। चिकित्सक ब्लैक फंगस होने के दो और कारण बता रहे हैं। इनमें से एक तो यह कि मरीज डायबिटीज से पीड़ित है। दूसरा यह कि कोविड का नया स्ट्रेन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना कम कर रहा है जिसके चलते ब्लैक फंगस होने का खतरा बढ़ गया है। 



अब चिकित्सक भी यह मानने लगे हैं कि जरूरी नहीं स्टेरॉयड लेने से ही ब्लैक फंगस हो। यह और भी कई कारणों से हो सकता है। आपको बता दें कि ब्लैक फंगस के बाद प्रदेश में व्हाइट फंगस के मामले भी सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार व्हाइट फंगस उतना खतरनाक नहीं है जितना कि ब्लैक फंगस! ईएनटी विभाग के चिकित्सकों के अनुसार मरीजों में एक्सपरजिलस और कंडीबा व्हाइट फंगस पाया गया है। कोविड के नये स्ट्रेन से ही शरीर में फंगस की शिकायत हो रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट!