कोरोना की दूसरी लहर  काला बाजारियोंके लिए चांदी कूटने का अवसर बन गई है।  अस्पताल मे बैड दिलाने, ऑक्सीजन उपलब्ध कराने और रेमड़ेसिविर इंजेक्शन दिलाने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे हुए हैं। यहां तक कि इंजेक्शन में कोरा पानी मिलाकर भी रेमडेसिविर के नाम से बेचने की खबरें सामने आई है। 

अब ब्लैक फंगस ने भी काला बाजारियों की पौ बारह कर दी है। बाजार में अचानक से बड़ी दवाओं और इंजेक्शन की मांग को देखते हुए उसके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। हालांकि सरकारी महकमे की ओर से फौरी तौर पर कार्रवाई की जाती है लेकिन ब्लैक मार्केटिंग के लोगों के हौसले इतने बुलंद है कि वह सारे  नियम कायदों को धता बताते हुए मनमाने तरीके से इस बाजार को पनपा रहे हैं। 



अपने नजदीकी परिजन को जल्द ठीक करने के लिए रिश्तेदार जो भी कोशिश होती है। वह करते हैं। मुंह मांगे दाम भी देते हैं। लेकिन कई बार उनको दवाओं के नाम पर ठगने की घटनाएं भी सामने आ रही है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान दवाओं की कालाबाजारी से करोड़ों रुपए कमाए गए हैं। और यह सिलसिला अभी तक लगातार बना हुआ है।

ब्यूरो रिपोर्ट!