प्रदेश में एक तरह से देखा जाए तो दूसरी लहर अभी गई नहीं और इसी बीच जैसे कि संभावना जताई जा रही थी, तीसरी लहर ने खतरनाक रूप से दस्तक दे दी है। पिछले 22 दिन के दौरान प्रदेश के लगभग 7000 बच्चे और किशोर इस महामारी की चपेट में आ गए हैं। कोरोना बच्चों में तेजी से फैल रहा है।


अकेले जोधपुर में ही दो हजार से ज्यादा 2307 बच्चे संक्रमित पाए गए हैं। सीकर में 800, अजमेर में 522, दौसा में 350, झुंझुनू में 220, उदयपुर में 70 और हनुमानगढ़ में 24 बच्चों में संक्रमण पाया गया है। इन सभी बच्चों की उम्र 1 से लेकर 18 वर्ष तक की है। ऐसे में इसके और भी खतरनाक होने की संभावना जताई जा रही है जबकि इससे निपटने के लिए संसाधनों की कमी साफ तौर पर सामने नजर आ रही है। प्रदेश में केवल 60 स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट है। इनमें कुल 12 सौ बेड की व्यवस्था है। इनमें वेंटिलेटर नहीं होते। 



राज्य में 658 सीएचसी और 1250 से अधिक पीएचसी है, लेकिन इनमें से 90% जगह पर केवल परामर्श देने और दवाइयां लिखने की सुविधा है। कोई वार्ड या भर्ती करने की सुविधा नहीं है। अगर बात शिशु रोगों से जुड़े चिकित्सा महकमे की करें  तो इसमें भी डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों का टोटा है। यदि यह संक्रमण बच्चों में तेजी से फैला तो हालात और भी विकट होने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।


ब्यूरो रिपोर्ट!