कोरोना से जूझते मरीज को सबसे पहले जो चीज चाहिए होती है वह होती है प्राणवायु यानी ऑक्सीजन। फेफड़ों में संक्रमण के चलते मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है और उसकी सांसों को नियंत्रित करने की दिशा में तुरंत ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है।
लेकिन हालात देखे जाए तो प्राणवायु मिलने के लिए या इसे पाने के लिए लोगों के प्राण ही संकट में आ रहे हैं। सरकारी और निजी सभी अस्पतालों में बैड फुल है। वहीं ऑक्सीजन यदि 50 सिलेंडर चाहिए तो 25 या 30 ही मिल पा रहे हैं ऐसे में जब किसी संक्रमित मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करने के लिए ले जाया जाता है तो कहते हैं बैड तो उपलब्ध है लेकिन हमारे पास ऑक्सीजन नहीं है। यदि आप ऑक्सीजन लेकर आते हैं तो हम मरीज को भर्ती कर लेंगे। मरीज के इलाज के लिए तत्पर हो रहे परिजन उसे में अजीब सी दुविधा में फंस जाते हैं। चारों तरफ जुगाड़ करने की कोशिश होती है, लेकिन हर जगह से उन्हें 100% निराशा ही हाथ लगती है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ खबर है। हमने इसका वास्तव में अनुभव भी लिया है
और अपने ही परिजन के लिए राजधानी के कई अस्पतालों की खाक भी छानी है। चारों तरफ प्रयास भी किए हैं लेकिन ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हुई। उधर सरकार भले ही आपूर्ति सुनिश्चित होने का दावा कर रही हो लेकिन यथार्थ के धरातल पर पूरे प्रदेश में अभी भी ऑक्सीजन की मारामारी चल रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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