सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों को  कोरोना काल के शैक्षणिक सत्र 2020-21 की फीस वसूली में 15 फीसदी की छूट देने को कहा है। कोर्ट ने सर्वोच्च फीस वसूली से पहले राजस्थान निजी स्कूल फीस एक्ट 2016 के तहत शैक्षणिक सत्र 2019-20 की फीस तय करने के निर्देश भी दिए है। इसके बाद तय फीस को छह समान किश्तों में 8 फरवरी 2021 से 5 अगस्त 2021 तक अदा करनी होगी। कोर्ट ने कहा है कि स्कूल संचालक शैक्षणिक सत्र 2021-22 में पूरी फीस वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। 


फीस जमा नहीं हुई तो.....


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे की फीस जमा नहीं होने पर स्कूल संचालक न तो उसका नाम काटेंगे और न ही उसे ऑनलाइन या फिजिकल क्लास में शामिल होने से रोकेगें और न ही इस कारण उसका परिणाम ही रोकेगा। 

जस्टिस ए एम खानविलकर व दिनेश माहेश्वरी ने यह आदेश सोमवार को मैनेजिंग कमेटी सवाई मानसिंह विद्यालय, गांधी सेवा सदन, सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस सहित फी-रैग्युलेशन एक्ट 2016 को चुनौती देने वाली भारतीय विद्या भवन सोसायटी की एसएलपी पर दिया। 



हाइकोर्ट का आदेश रद्द.....


सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के 18 दिसंबर  2020 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें निजी स्कूल संचालकों को राज्य सरकार के 28 अक्टूबर के आदेश की सिफारिशों के अनुसार फीस वसूल करने की छूट देते हुए राज्य सरकार के फीस तय करने के निर्णय में दखल देने से इंकार कर दिया था। साथ ही हाईकोर्ट की एकलपीठ के 28 अक्टूबर 2020 के आदेश को भी खत्म करते हुए अदालती आदेश के पालन में दायर की गई अवमानना याचिकाओं काे भी निपटारा कर दिया। इस मामले में निजी स्कूल संचालकों की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान, प्रतीक कासलीवाल व अनुरूप सिंघी ने पैरवी की। जबकि राज्य सरकार की ओर से एएजी मनीष सिंघवी व अभिभावकों की ओर से एडवोकेट सुनील समदड़िया ने पैरवी की।



स्कूल फीस एक्ट 2016 के साथ रूल्स 2017 को भी दिया वैध करार : 


सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल फीस एक्ट 2016 व रूल्स 2017 को वैध  करार दिया। लेकिन एक्ट की धारा 4, 7 व 10 की व्याख्या स्कूलों की स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए की है। अदालत ने कहा कि स्कूल फीस कमेटी में वही अभिभावक शामिल होंगे जिन्हें एक्ट व अकाउंटस की समझ होगी। इसके अलावा आरटीई का लाभ ले रहे अभिभावक कमेटी में शामिल नहीं होंगे। यह कमेटी मिलकर फीस का निर्धारण करेगी और दोनों पक्षों को आपत्ति नहीं होने पर वही फीस तय मानी जाएगी। लेकिन किसी भी पक्ष को आपत्ति है तो वह डिवीजनल फीस रैग्यूलेटरी कमेटी में जा सकता है। 


यह है मामला:  हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन व अन्य की याचिका पर 7 सितंबर को निजी स्कूलों की 70 फीसदी ट्यूशन फीस वसूल करने की छूट दी थी। राज्य सरकार व अन्य की इस आदेश के खिलाफ अपील पर खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को अंतरिम रूप से फीस तय करने को कहा था। जिसकी पालना में राज्य सरकार ने कमेटी की सिफारिशों पर सीबीएसई की कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस का 70 फीसदी और राजस्थान बोर्ड की इन कक्षाओं की ट्यूशन फीस का 60 फीसदी वसूलना तय किया। राजस्थान हाईकोर्ट व राज्य सरकार की कार्रवाई को निजी स्कूल संचालकों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर चुनौती दी थी।

जयपुर ब्यूरो।