कोटा से हँसपाल यादव की रिपोर्ट।
शहर में मौसम ने फिर से बदलाव आया। शुक्रवार को तेज हुई और बरसात से भामाशाहमंडी में खुले में रखा लहसुन व अन्य जिंस भीग गई। शहर पानी-पानी हो गया। सडक़ों व गलियों में पानी बह निकला। निगम की सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। कई इलाकों की बिजली गुल हो गई। थोड़ी देर तक तेज हवा संग तेज बारिश का दौर चला। फिर आसमान में काले बादल छा गए। लोग मौसम का लुत्फ उठाने के लिए छतों पर पहुंच गए। इधर अचानक बारिश होने से भामाशाह मंडी में किसानों को लहसुन व अन्य जिंस को ढकने के लिए तिरपाल भी नहीं मिले। बरसात के बाद भामाशाह मंडी समेत विभिन्न मंडियों में किसानों का करोड़ों की लागत का खुले में पड़ा गेहूं समेत दूसरा माल भीग गया है। भामाशाह मंडी में आज एक ही दिन में करीब 30 हजार बोरियों की आवक हुई थी। 15 दिनों के बाद शुक्रवार को जाकर मंडी खुली थी लेकिन पहले ही दिन एफसीआई के कुप्रबंधन और कुदरत के कहर ने किसानों पर दोहरी चोट की।
एफसीआई के कुप्रबंधन और कुदरत के कहर ने किसानों पर दोहरी चोट
मंडी प्रबंधन और एफसीआई प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते बारिश से खराबे के बाद मंडी में जमा किसान भडक़ गए। समर्थन मूल्य कांटों पर धीमी तुलाई पर नाराजगी जताई। किसानों की नाराजगी देख एफसीआई स्टाफ मौके से भाग छुटे। कुछ किसान नेताओं ने जैसे-तैसे किसानों को शांत कराया। बारिश के बाद किसानों ने अपने माल को संभाला। वहीं, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष मुकुट नागर भी भामाशाह मंडी पहुंच गएद्ध वहां एफसीआई के कर्मचारी और नागर आमने-सामने हो गए। एफसीआई के कर्मचारी ने नागर पर मारपीट का आरोप लगाया हैं। वहीं, नागर ने कहा कि एफसीआई की लापरवाही के कारण किसानों की २० हजार बोरी जींस भीग गइ्र हैं। इसकी भरपाई कौन करेगा।


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