प्रदेश में बड़े जोर शोर से शुरू की गई मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना हकीकत के धरातल पर सही नहीं उतरी। ज्यादातर निजी अस्पतालों ने इस योजना से दूरी बना ली है


आए दिन मरीजों से मनमाने शुल्क वसूलने के मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों को केस लेट कार्ड होने के बावजूद पैसे जमा करवाने पर रहे हैं। ज्यादातर बड़े अस्पतालों ने तो भर्ती के दौरान ही मरीजों के परिजनों को कहना शुरू कर दिया है कि चिरंजीवी योजना के जरिए इलाज नहीं किया जाएगा। हालांकि सरकार के पास भी इस बाबत कई शिकायतें पहुंच रही है लेकिन कार्यवाई नाकाफी के बराबर है। 



उधर इस योजना को लागू करने के पीछे निजी अस्पतालों का  कहना है कि उनको इससे पहले की योजनाओं का ही भुगतान आज तक नहीं मिला। यूनाइटेड प्राइवेट क्लिनिक एंड हॉस्पिटल एसोसिएशन ऑफ राजस्थान ने इस संबंध में राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस एजेंसी को पत्र भी लिखा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार की हर स्वास्थ्य योजना मे, चाहे भामाशाह हो या अन्य कोई योजना, निजी अस्पतालों ने उस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया लेकिन उन योजनाओं की ही बकाया रकम आज तक उन्हें नहीं मिली।

ब्यूरो रिपोर्ट।