इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई मैसेज चल रहे हैं जिनमें बच्चों के बारे में बताया जाता है कि यह बच्चे बेसहारा हो गए। इनके माता-पिता की मौत कोरोना के चलते हो गई। अब इनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। दिनों दिन बढ़ते जा रहे ऐसे संदेशों को देखते हुए केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस बारे में गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है
कि ऐसे संदेश कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले हैं और जो लोग बिना कानूनी प्रावधान पूरे किए ऐसे बच्चों को गोद लेंगे, वह गैरकानूनी होगा। मंत्रालय ने बेसहारा बच्चों के पुनर्वास के लिए गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि ऐसे बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति सीडब्ल्यूसी के सामने लाया जाएगा।
यह समिति ऐसे बच्चों की जरूरतों का पता लगाएगी और उनके पुनर्वास के लिए आदेश पारित करेगी। जहां तक संभव हो सकेगा बच्चों को उनके परिवार और सामुदायिक वातावरण में रखने की कोशिश की जाएगी। उनके परिवेश में सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। किशोर न्याय अधिनियम के मुताबिक उनके हितों की रक्षा भी की जाएगी और जो लोग बच्चों को गोद लेना चाहते हैं,वे सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी से संपर्क करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत गोद ले सकेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट!


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