ब्यूरो रिपोर्ट। 

गुढ़ामलानी से कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी ने मंगलवार दोपहर अपना स्तीफा ईमेल और डाक दोनों से विधानसभा स्पीकर को भेज दिया।  विधानसभा सचिवालय से भी स्टीफ़े की पुष्टि हो गई और बयान जारी हुआ कि नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।  हेमाराम इससे पहले भी एक से अधिक बार स्तीफा दे चुके हैं।  पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के वयोवृद्ध सिपहसालार हेमाराम चौधरी के स्टीफ़े के बाद पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया और राजस्व मंत्री हरीश चौधरी तीनों ने ही हेमाराम से फोन पर बात की और मुख्यमंत्री गहलोत को अपना अपना फीडबैक दे दिया है।  

बाद में जारी बयान में हेमाराम चौधरी ने कहा कि वे ढाई साल विधायक रह चुके हैं और यदि अब बचे ढाई साल विधायक नहीं रहेंगे तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चौधरी ने कहा कि स्टीफ़े की वजह स्तीफा स्वीकार होने के बाद बताऊंगा।  उन्हौने माना कि उन्हौने पहले भी स्तीफा दिया था लेकिन पार्टी के माना लेने से वे मान गए थे और स्तीफा वापस ले लिया था।  

अब अंदरखाने की बात। हेमाराम 70 साल के पार की उम्र पा चुके हैं और अच्छे से जानते हैं कि जो होना है और जो कुछ भी मिलना है इसी कार्यकाल में होगा क्योंकि 75 की उम्र में अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट की उम्मीद ही बेमानी होगी। इसी सोच के चलते हेमाराम ने सचिन पायलट के बगावती तेवरों में अपने सुर मिलाए थे लेकिन गीत पूरा ना हो सका।  उनके निकटवर्ती लोगों का कहना है कि कोरोना काल में इतनी मौतों की खबर देख-सुन कर चौधरी साहब ने मन बना लिया है कि गहलोत साहब से होने वाले मंत्री मंडल फेरबदल में मंत्री पद या उससे पहले कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्ति की बात तय कर ली जाए क्योंकि आजकल तो बिना उम्र भी चला-चली की बेला है।