देश में कोरोनावायरस के चलते बिगड़े हालात को लेकर अब प्रजातंत्र का तीसरा स्तंभ यानी न्यायपालिका भी सक्रिय हो गया है। कई राज्यों के हाई कोर्ट सहित सुप्रीम कोर्ट भी देश के हालातों पर बराबर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर सरकारों को स्वयं संज्ञान लेकर उचित निर्देश देने में जुट गए हैं। यही नहीं अब तो निर्देशों की पालना पर भी सख्ती से नजर रखनी शुरू कर दी है।


 मंगलवार को छत्तीसगढ़  हाई कोर्ट ने सरकार के उस आदेश को झटका दिया जिसमें कहा गया था कि सरकार 18 प्लस टीकाकरण अभियान में गरीबों को प्राथमिकता देगी। इस पर हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि यह बीमारी अमीरी गरीबी देख कर नहीं आती। डब्ल्यूएचओ ने जो वैक्सीनेशन के मानक तय किए हैं, उनमें किसी को भी बदलाव करने का अधिकार नहीं है। सरकार गरीब- अमीर के आधार पर टीकाकरण नहीं कर सकती। इसलिए वैक्सीनेशन सबके लिए समान नीति से होना चाहिए। वहीं गुजरात हाई कोर्ट ने भी कहा कि हालात से निपटने के किए जा रहे उपायों को लेकर अब राज्य सरकार के रवैए से संतुष्ट नहीं हैं।



 गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विकास नाथ और न्यायाधीश।  भार्गव डी कारिया की खंडपीठ ने कहा कि हम गुजरात सरकार और अहमदाबाद महानगर पालिका से काफी दुखी हैं? उन्होंने कोर्ट की ओर से जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किया। अगर ऐसा ही रवैया रहा तो कोर्ट को और भी कड़े कदम उठायेगा। वहीं राजधानी दिल्ली में भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फिर जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि गंभीर हालात होने के बावजूद केंद्र सरकार शुतुरमुर्ग के समान अपनी गर्दन रेत में छुपा सकती है लेकिन न्यायपालिका नहीं। लोग मर रहे हैं और आप न्यायपालिका को कह रहे हैं कि आप भावुक नजरिए से ना देखें। तो हम सरकार से पूछते हैं कि क्यों नहीं देखें? केंद्र सरकार हालात पर अंधी हो सकती है

लेकिन न्यायपालिका खुली नजरों से सब देख रही है। ऐसे ही पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार को यह आदेश दिया है कि लोगों को घरों पर ऑक्सीजन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करें। ताकि लोगों का जीवन समय रहते बचाया जा सके। और ऑक्सीजन सप्लाई का काम नगर निकाय को दिया जाए। देखा जाए तो देश में ऑक्सीजन और बैड की कमी को लेकर जो हालात उत्पन्न हुए हैं। उनसे चाहे केंद्र हो या राज्य सरकार, पूरी तैयारी नहीं होने की वजह से निपट नहीं पाई है। यहां तक कि अब इमरजेंसी के तौर पर उठाए गए कदम भी अपने सार्थक परिणाम फिलहाल नहीं दे पा रहे हैं।



ब्यूरो रिपोर्ट!