बिल्कुल सही पढ़ा है आपने यही लिखा है हमने। यदि आपका शरीर बिल्कुल फिट रहेगा तो कोरोना तो क्या दूसरी अन्य कई बीमारियां भी आपके पास आने से कतराएगी। पिछले 1 साल से हम इम्यूनिटी बढ़ाओ, इम्यूनिटी बढ़ाओ। यह सब कुछ सुन रहे हैं और जितनी फुर्सत हमें पिछले 14 महीनों के दौरान मिली है। शायद ही हमारे जीवन में हमें इतनी फुर्सत कभी मिली हो। लेकिन हम लोगों में से कितने प्रतिशत लोग इस दौरान अपने शरीर के प्रति सतर्क हुए हैं,
एक्टिव हुए हैं। क्या हम 24 घंटे में से एक घंटा भी अपने शरीर को दे पाए हैं? लगभग 80 से 90% लोगों का जवाब आएगा कि नहीं। हम पिछले कई वर्षों से सुनते आए हैं कि दैनिक व्यायाम जीवन का एक अहम हिस्सा होना चाहिए। उससे हमें कई बीमारियों से निजात मिलती है, बल्कि हम दिन भर चुस्त-दुरूस्त और फुर्तीले रहते हैं। देखा जाए तो हम लोगों ने अपने आप को दवाओं पर इतना आश्रित कर लिया है कि अब पानी के साथ गोली गटकना ही हमको काफी सुविधाजनक लगता है। आधे घंटे या 1 घंटे व्यायाम के जरिए पसीने बहाना हमें बहुत ही मुश्किल भरा काम लगता है। हम यह नहीं सोचते कि हमारा खुद का आलस्य ही हमारे शरीर को किस स्तर तक हानि पहुंचा रहा है? एलोपैथी हो, होम्योपैथी हो, या फिर आयुर्वेद। तीनों ही विज्ञान यह कहते हैं कि आप अपने शरीर के प्रति सतर्क रहें। व्यायाम करें। खुली हवा में प्राणायाम करें और रोजाना कम से कम 4 किलोमीटर की वॉक करें। तो आपका शरीर आपका जीवन भर साथ देगा। अगर हम समय रहते इस दिशा में सतर्क और सावधान रहते तो जो ऑक्सीजन की हमें आज जरूरत पड़ी है, हो सकता है
इसकी आधी भी जरूरत नहीं रहती। और वर्तमान में भी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के बावजूद चिकित्सक प्रोन पोजीशन क्रिया के जरिए कई मरीजों की सांसे दुरुस्त कर रहे हैं। अगर हम प्राकृतिक संसाधनों को अपनाते हुए दैनिक जीवन में 1 घंटे के व्यायाम को शामिल करेंगे तो हो सकता है आने वाले 1 महीने के दौरान ही हमें इस महामारी को रोकने में काफी सफलता मिलेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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