भारत में सबसे ज्यादा हिंदू
ऋषिकेश राजोरिया की कलम से।
भारत में 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक 79.80 फीसदी हिंदू, 14.2 फीसदी मुसलमान, 2.3 फीसदी ईसाई, 1.7 फीसदी सिख, 0.7 फीसदी बौद्ध, 0.4 फीसदी जैन और 0.7 फीसदी पारसी, यहूदी, बहाई और अन्य धर्मावलंबी रहते हैं। हिंदुओं की आबादी 79.80 फीसदी अवश्य है, लेकिन वे कई संगठनों में विभाजित हैं और उनमें सामाजिक आधार पर कई मतभेद हैं। जैसा कि पहले स्पष्ट किया जा चुका है कि भारत में धर्म की नई व्याख्याएं करने का सिलसिला आदिकाल से चला आ रहा है और यह अब तक नहीं रुका है। लोगों ने अपना सामाजिक जीवन सुगम बनाने के लिए कई संतों के नाम पर धार्मिक संगठन बना लिए हैं और नए-नए भगवान भी बने हैं, जिनमें साईं बाबा प्रमुख है। शिरडी के साईबाबा के बाद आंध्र प्रदेश में सत्य साईं बाबा हुए, जिनके नाम पर बहुत बड़ा संगठन है।
गीताप्रेस गोरखपुर के माध्यम से वैष्णव मतावलंबियों की आस्था पुष्ट करने का सिलसिला बना, वहीं कुछ अलग धार्मिक संगठन भी अस्तित्व में आए। कबीर पंथ, सिख धर्म, ब्रह्म समाज, आर्य समाज आदि का हिंदुओं में अच्छा खासा प्रसार हुआ। 1950 के दशक में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने सनातन वैदिक सिद्धांतों के आधार पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की। उन्होंने धर्म और विज्ञान में तालमेल स्थापित करने वाला साहित्य भी बड़े पैमाने पर प्रकाशित किया। उन्होंने युग निर्माण योजना के तहत समाज सुधार का नया अभियान शुरू किया। उनकी विचारधारा पर गायत्री परिवार के अंतर्गत विवाह आदि के नए रीति-रिवाज बने। ये सभी हिंदू हैं।
1952 में उत्तर प्रदेश के मथुरा में बाबा जय गुरुदेव ने समाज सुधार का अभियान शुरू करते हुए नारा दिया, जय गुरुदेव, सतयुग आएगा। दीवारों पर नारे लिखकर धार्मिक प्रचार का सिलसिला जय गुरुदेव ने शुरू किया। आज देश-विदेश में जय गुरुदेव के करोड़ों अनुयायी हैं और वे सभी हिंदू हैं। बाबा जय गुरुदेव का 116 वर्ष की उम्र में 18 मई 2012 की रात मथुरा में निधन हुआ था। उसके बाद से उनके ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है।
हिंदुओं का एक संगठन राधास्वामी सत्संग ब्यास नाम से है, जिसकी स्थापना 1861 में बसंत पंचमी के दिन शिवदयाल साहिब ने की थी। आगरा के दयालबाग में राधास्वामी मत का प्रमुख मंदिर है। विश्व में करीब दो करोड़ लोग राधास्वामी सत्संग की विचारधारा का पालन करते हैं। इसका प्रमुख डेरा पंजाब में जालंधर से 25 किलोमीटर और अमृतसर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित ब्यास नामक स्थान पर है। डेरे के पास चार हजार एकड़ से ज्यादा जमीन है। डेरे की स्थापना 1891 में की गई थी। फिलहाल करीब सौ देशों के लोग डेरे से जुड़े हुए हैं। यह संस्था किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी हुई नहीं है। राधास्वामी सत्संग ब्यास का उद्देश्य धार्मिक संदेश देना है। राधा का अर्थ आत्मा है और स्वामी का अर्थ भगवान। सत्संग का अर्थ है सच्चाई से परिचय कराना। ये सभी हिंदू हैं।
हिंदुओं में एक दादूपंथी संप्रदाय है। हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में दादूदयाल का नाम आता है। संत दादूदयाल का जन्म फाल्गुन शुक्ल अष्टमी विक्रम संवत 1601 में गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। उन्होंने 12 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था। उन्होंने राजस्थान में आबू पर्वतमाला और तीर्थराज पुष्कर में कठोर तपस्या की थी। संवत 1625 में उन्होंने सांभर में पहली बार धार्मिक उपदेश देना शुरू किया। इसके बाद कई लोग उनके भक्त बनने लगे। तत्कालीन बादशाह अकबर ने दादूदयाल को फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया था और उनके उपदेशों से प्रभावित होकर पूरे राज्य में गौहत्या बंदी का फरमान लागू कर दिया था। जयपुर जिले के नरेना में दादूदयाल ने एक खेजड़े के पेड़ के नीचे लंबी तपस्या की और यहीं उन्होंने ब्रह्मधाम दादूद्वारा की स्थापना की थी। दादूदयाल के 52 पट्ट शिष्य थे, जिनमें गरीबदास, सुंदरदास, रज्जब और बखना प्रमुख हैं। दादूदयाल के उपदेशों को रज्जब ने दादू अनुभव वाणी के रूप में संकलित किया है। इसमें करीब पांच हजार दोहे हैं, जिनके आधार पर दादू पंथियों की विचारधारा बनी है।
एक मई 1897 को कोलकाता में रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। सेवा, परोपकार और वेदांत दर्शन का प्रचार-प्रसार इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। इसका ध्येयवाक्य है- आत्मनो मोक्षार्थं जगद्हिताय च। भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में रामकृष्ण मिशन का महत्वपूर्ण योगदान है।
एक संत आसाराम हुए हैं, जो अपनी विचारधारा पर आधारित हिंदुओं का एक नया धार्मिक संगठन बनाने के बाद बलात्कार के मामले में जेल चले गए। उनका जन्म 17 अप्रैल 1941 को नवाबशाह जिले के बेराणी गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। देश विभाजन के बाद उनके परिवार को सबकुछ छोड़कर गुजरात में शरण लेनी पड़ी थी। आसाराम का पूरा नाम आसूमल थाउमल सिरुमलानी है। उन्होंने युवावस्था में लक्ष्मीदेवी से विवाह किया, जिनसे उनका एक पुत्र नारायण और एक पुत्री भारती है। पिता के निधन के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की। नैनीताल में उन्होंने लीलाशाहजी महाराज से दीक्षा प्राप्त की और आसाराम नाम से धार्मिक उपदेश देने लगे। उनकी संस्था ने कई स्कूल और आश्रम खोले। कुछ ही वर्षों में आसाराम के भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच गई थी।
हिंदुओं का एक अन्य धार्मिक संगठन 1948 में डेरा सच्चा सौदा नाम से बना। एक संत शाह मस्तानाजी ने इसकी स्थापना की थी। हरियाणा के सिरसा स्थित बेगू मार्ग पर इसका मुख्यालय है। वर्तमान में इसके प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह हैं, जो बलात्कार और हत्या के आरोप में जेल काट रहे हैं। कृष्ण की भक्ति पर आधारित एक संगठन अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (अंग्रेजी में संक्षेप में इस्कॉन) की स्थापना 1966 में न्यूयार्क में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। इसे हरे कृष्ण आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। आज देश-विदेश में इस्कॉन संचालित 400 से ज्यादा मंदिरों के अलावा, विद्यालय आदि स्थापित हो चुके हैं।
एक हिंदू संत महर्षि महेश योगी हुए हैं, जिनका जन्म 12 जनवरी 1918 को छत्तीसगढ़ में राजिम जिले के पांडुका गांव में हुआ था। वह जन्म से कायस्थ थे और उनका नाम महेश प्रसाद वर्मा था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र के स्नातक होने के बाद उनका झुकाव अध्यात्म की ओर हुआ। हिमालय में दो वर्ष मौन व्रत के बाद उन्होंने धार्मिक उपदेश देना शुरू किया। उन्होंने अमेरिका पहुंचकर विश्व के लोगों का भारतीय योग-ध्यान से परिचय करवाया, ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन अर्थात भावातीत ध्यान अपनाने की प्रेरणा दी और महर्षि मुक्त विश्वविद्यालय स्थापित किया। उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का भी प्रचार-प्रसार किया। हालैंड में एम्सटर्डम के पास व्लोड्रॉप नामक गांव में उन्होंने आश्रम बनाया और वहीं अंतिम सांस ली।
महर्षि महेश योगी ने अपनी एक अलग मुद्रा राम मुद्रा का प्रचलन भी शुरू किया था, जिसे नीदरलैंड्स में कानूनी मान्यता प्राप्त है। डच सेंट्रल बैंक के मुताबिक करीब 2015 में राम मुद्रा के करीब एक लाख नोट प्रचलन में थे। अमेरिकी राज्य वाइवा में स्थापित महर्षि वैदिक सिटी में भी राम मुद्रा चलती है। इसके अलावा 35 अमेरिकी राज्यों में राम मुद्रा आधारित बांड्स चलते हैं। महर्षि महेश योगी पांच फरवरी 2008 को व्लोड्रॉप में ही 91 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हुए। 2008 में उनकी संस्था की एक रिपोर्ट के मुताबिक महेश योगी ने 150 देशों में करीब 500 स्कूल, चार महर्षि विश्वविद्यालय और चार देशों में वैदिक शिक्षण संस्थान खोल रखे थे। उनका संगठन लाभ अर्जित करने वाला संगठन नहीं था, फिर भी उसके पास करीब 160 अरब रुपए की संपत्ति बताई जाती है, जिसको लेकर विवाद जारी है।

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