कोरोना के इलाज की दिशा मे राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है,

 बैड नहीं है और तो और रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर जो हालात इन दिनों नजर आ रहे हैं, उसको देखते हुए लगता है कि आने वाले दिनों में कहीं यह समस्या औऱ भी गंभीर नहीं हो जाए। राजधानी के सीएमएचओ कार्यालय में  सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी है। लोग चिकित्सकों से पर्ची लेकर रेमडेसीविर इंजेक्शन लेने के लिए सीएमएचओ कार्यालय पहुंच रहे हैं। दिन भर जद्दोजहद होती रहती है और नतीजा ढाक के तीन पात। क्योंकि जिस तरह से डिमांड बढ़ी है, उसके अनुरूप इंजेक्शन की सप्लाई सुचारू हो नहीं पा रही। हालात इस कदर बिगड़ रही है कि कई बार हंगामे की नौबत के चलते पुलिस बुलानी पड़ती है।


सीएमएचओ कार्यालय में रविवार के दिन ही इस इंजेक्शन के लिए लगभग 1500 आवेदन आए।  उनमें से सिर्फ 40 इंजेक्शन ही बांटे गए।  जब अन्य लोगों को इंजेक्शन नहीं मिले तो वहां हंगामा खड़ा हो गया। इसके बाद 60 और इंजेक्शन बांटे गए।  1500 के मुकाबले दोपहर तक सिर्फ 100 इंजेक्शन ही वितरित किए जा सके।  उसके बाद हंगामा खड़ा हुआ तो पुलिस बुला ली गई।  आपको बता दें कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई के लिए जिला कलेक्टर अतर सिंह नेहरा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। 

उस कमेटी के अनुमोदन के बाद ही इंजेक्शन वितरित किए जा रहे हैं। लेकिन जहां तक जमीनी हकीकत की बात है तो कमेटी के सदस्य इस कदर परेशान हो चुके हैं कि अब उन्होंने मीडिया का भी फोन रिसीव करना बंद कर दिया है।वहीं निजी बाजार में यह इंजेक्शन अपनी कीमत से 5 से 6 गुना तक कालाबाजारी के रूप में बिक रहा है।

ब्यूरो रिपोर्ट!