कोरोना महामारी ने जिले के मुखिया जी की सारी व्यवस्थाएं एक तरह से चरमरा के रख दी है। अल सुबह से ही मुखिया जी इसके चिकित्सा प्रबंधों को लेकर इतना व्यस्त हो जाते हैं कि अब उनको अन्य किसी काम की फुर्सत ही नहीं। जब देखो जब फोन की घंटी बजती रहती है, एक से बात करते हैं तो 5 इंतजार में रहते हैं। हालात ये हो गई है कि समय से खाना पीना औऱ नहाना धोना भी इन दिनों मुश्किल साबित हो रहा है।
देखा जाए तो हर जिले के मुखिया जी की लगभग कमोबेश ऐसी ही स्थितियां नजर आ रही है। आपको बता दें कि जिला कलेक्टर यानी हर जिले के मुखिया। उन पर पूरे जिले की जिम्मेदारी होती है। मंत्री से लेकर आला अधिकारियों तक निर्देशों की पालना और फिर मॉनिटरिंग करना। अपने आप में एक जिम्मेदारी भरा काम होता है। यही नहीं।। लगभग सारे विभागों पर नजर रखना भी उनके कार्य का एक हिस्सा है। देखा जाए तो हर जिले में राजस्व, न्यायिक जिम्मेदारी, प्रशासनिक जिम्मेदारी, आपदा राहत के प्रबंध, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, निर्वाचन से संबंधित कार्य और विकास योजनाओं से जुड़े सभी काम कलेक्टर के अधीन रहते हैं।
इसके अलावा जनता से मिलकर उनकी समस्याओं का निराकरण करना भी उनकी जिम्मेदारी है। ऐसे में कोरोना के चलते अन्य सभी काम एक तरह से गौण होते जा रहे हैं। क्योंकि मुखिया जी को इतनी फुर्सत ही नहीं मिल पाती कि वह दूसरे कामों पर भी विशेष नजर रखें। जनता से मिले और उनके दुख दर्द दूर करें। महामारी के प्रबंधों में ही मुखिया जी इतने उलझ गए हैं कि सुबह से शाम तक चाहे ऑक्सीजन सप्लाई हो, रेमडेसीविर इंजेक्शन की सप्लाई हो, अस्पतालों में बैड के इंतजाम हो या अन्य दवाओं की आपूर्ति की बात हो। इन सब कामों को देखने में ही पूरा दिन बीत जाता है। देखा जाए तो इन दिनों सबसे व्यस्त जिले के मुखिया जी ही नजर आते हैं। रही बात नेताओं की तो उनके जिम्मे तो सिर्फ दौरा करना और उसके बाद में मीडिया को सरकार के पक्ष में बयान देना ही रह गया है।
ब्यूरो रिपोर्ट!



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