जयपुर से मुकेश शर्मा की रिपोर्ट,
आधार कार्ड के लिए यू आई डी ए आई के द्वारा ली गई जानकारी की गोपनीयता पर शुरू से ही गंभीर सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि 2018 में सुप्रीम कोर्ट आधार एक्ट को सही ठहरा चुका है और जनवरी 2021 में पांच जज की संविधानिक बैंच ने चार एक के बहुमत से रिव्यू पिटिशन भी खारिज कर दी हैं। लेकिन अभी इस मामले में सात जज की संविधानिक बैंच में सुनवाई होना बाकी है।
आधार जानकारी के लीक होने का ताजा मामला पुडुचेरी में सामने आया है। मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई है। इसमें पुडुचेरी विधानसभा चुनाव प्रचार में बीजेपी की ओर से केवल आधार से लिंक मोबाइल नंबरों पर प्रचार के मेसेज भेजने के आरोप लगाते हुए इसे गोपनीयता का उल्लंघन माना है। इन मेसेज में बीजेपी के बूथ लेवल व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने का निमंत्रण भेजा है।
बीजेपी ने कार्यकर्ताओं पर डाली जिम्मेदारी:
पुडुचेरी बीजेपी यूनिट ने खुद को पाक साफ बताते हुए पूरी जिम्मेदारी अपने कार्यकर्ताओं पर डाल दी है। बीजेपी ने कोर्ट को कहा है कि उसने यू आई डी ए आई से कोई जानकारी नहीं ली बल्कि उसके कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर ही मोबाइल नंबर लिए हैं।
नागरिकों की गोपनीयता में सेंधमारी है यह :
कोर्ट ने बीजेपी की दलील को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कहा है कि यह मामला बिना अनुमति के प्रचार से एक राजनीतिक दल को फायदा होने के साथ ही नागरिकों की प्राइवेसी में सेंधमारी का गंभीर मामला है। इस मामले को राजनीति नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
यू आई डी ए आई को बताना ही होगा गोपनीयता भंग कैसे हुई ?
कोर्ट ने कहा है कि मात्र आधार से लिंक मोबाइल नंबरों पर ही एक पार्टी के प्रचार मेसेज आने के पुख्ता आधार है। यू आई डी ए आई को बताना ही होगा कि नागरिकों ने गोपनीयता बनाए रखने के विश्वास के साथ अपनी जानकारी दी थी तो वह गोपनीयता भंग कैसे हुई ? कोर्ट ने कहा है कि इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि नागरिकों की जानकारी की गोपनीयता की रक्षा करना यू आई डी ए आई का दायित्व है इसलिए लीकेज की पुख्ता जांच होनी चाहिए। बीजेपी की यह दलील पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि उसके कार्यकर्ताओं ने यह जानकारी अपने स्तर पर जुटाई है।
बिना मंजूरी के प्रचार हुआ यह :
कोर्ट ने कहा है इलेक्ट्रोनिक तरीके से बल्क मेसेज भेजना निर्वाचन आयोग की अनुमति के प्रचार करना है। आयोग ने मामले को दिल्ली में निर्वाचन आयोग में विचाराधीन बताया। इस पर कोर्ट ने कहा है कि आदर्श आचार संहिता के उल्लघंन होने या नहीं होने के बिंदु पर निर्वाचन आयोग को ही फैसला लेना है। इस मामले में अगली सुनवाई चुनाव पूरे होने के बाद 11 जून को होगी।


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