ब्यूरो रिपोर्ट!

कोरोना वायरस की महामारी के बीच देश में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर मद्रास हाई कोर्ट की ओर से चुनाव आयोग पर की गई तल्ख टिप्पणी के बाद मीडिया ने इस मामले को जबरदस्त तरीके से उठाया और  कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए चुनाव आयोग पर सवालों की झड़ी लगा दी। इससे बौखलाए चुनाव आयोग ने शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट में ही अर्जी लगाई और यह कहा कि मीडिया की टिप्पणियों से आयोग की छवि धूमिल हो रही है। इसलिए कोर्ट को मीडिया पर ऐसी खबरों पर रोक लगानी चाहिए। आयोग ने अपनी दलील में कहा कि मीडिया को सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियों को रिपोर्ट नहीं करना चाहिए। मीडिया वही रिपोर्ट करें जो कि कोर्ट अपने आदेश में देता है। आयोग ने यह भी कहा कि मीडिया की खबरों ने देश की एक स्वतंत्र, संवैधानिक एजेंसी की छवि को धूमिल किया है। आयोग का कहना था कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए उस पर उंगली उठाना किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। उसे जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी, आयोग ने उसी को निभाया है। राजनीतिक नेता अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे हैं। कोर्ट के सामने आयोग की यह दलील कि आयोग की कोई गलती नहीं है। राजनीतिक नेता अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे हैं। सीधा इसी बात को इशारा करता है कि आयोग ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सीधे देश के प्रमुख दलों के नेताओं पर उंगली उठाई है। आपको बता दें कि वैसे भी सुप्रीम कोर्ट कोरोना से जुड़ी खबरों को लेकर केंद्र सरकार को यह बता चुका है कि वह मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं लगाएगा। इस मामले में मीडिया रिपोर्टिंग करने के लिए स्वतंत्र है क्योंकि मीडिया के जरिए ही उनको वास्तविक हालात की जानकारी मिलती है जो कि केंद्र और राज्य सरकारें नहीं देती।