ब्यूरो रिपोर्ट!

प्रदेश में बिजली कंपनियों की हालत कंगाली के कगार पर पहुंच गई है। राजस्थान में बिजली कंपनियों को घाटा 86 हजार करोड़ पर पहुंच गया है और आर्थिक रूप से हालात बदतर होते जा रहे हैं। उत्पादन कंपनियों को बिजली खरीद के अभी 18000 करोड रुपए चुकाने हैं और खाता बिल्कुल खाली है। विद्युत मंत्रालय के एक आदेश ने इन कंपनियों की ही नहीं बल्कि राज्य सरकार की भी नींद उड़ा दी है। मंत्रालय ने 7 महीने की अवधि में ऐसे सभी भुगतान चुकाने के निर्देश दिए हैं जो बिजली खरीद से संबंधित है। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो ऐसी स्थिति में यह कंपनियां एक्सचेंज के जरिए बिजली नहीं खरीद सकेगी। ऐसे हालात के बीच मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने बिजली कंपनियों को हिदायत दी है कि वे अपने काम में सुधार लाए नहीं तो कार्यवाही के लिए तैयार रहें। निरंजन आर्य ने गुरुवार को बिजली विभाग की पांचों कंपनियों के आला अफसरों के साथ हुई मीटिंग के दौरान ये बात कही। मीटिंग में वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने कहा कि ऐसे पावर परचेज एग्रीमेंट जो लंबी अवधि के लिए किए गए हो और बिजली खरीद के लिए भी ज्यादा दर चुकानी पड़ रही हो। इस मामले में बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दूसरे राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों की बेहतर कार्य प्रणाली का अध्ययन करना चाहिए और उसे राजस्थान में भी लागू करना चाहिए। बैठक में अखिल अरोड़ा ने भी कंपनियों के हर साल बढ़ते जा रहे घाटे पर चिंता जताई। आपको बता दें कि गर्मियों का मौसम अब शुरू हो चुका है और बिजली विभाग पर ज्यादा भार पड़ना तय है ऐसे में उत्पादन कंपनियां अब कैसे मांग और पूर्ति में संतुलन बनाए रखेगी। यह देखने वाली बात होगी।