सुनो 

तुम जो भी हो 

उर्वशी या रम्भा 

मोहिनी या तिलोत्तमा 

या कोई और 

कब तक 

आख़िर कब तक 

बचाती रहोगी 

तुम 

एक लम्पट 

डरपोक राजा को 

तथा

होती रहोगी शापित ,

और 

मेनका तुम 

क्या 

तुमको भान था

इस बात का 

कि 

जिसके तप को

तोड़ने के लिये

तुम आयीं

स्वर्ग से धरती पर

जिसकी 

नाजाइज़ बेटी को 

छोड़ गयी थीं तुम 

कण्व ऋषि के 

आश्रम में 

उसी नाजाइज़ बेटी

की सन्तान

के नाम पर 

रखा जायेगा

इस महान देश का 

नाम 

लेकिन

उस पुत्र का पिता 

भूला रहेगा सबकुछ 

अँगूठी 

मिल जाने के बाद भी !


©️✍ लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'