ब्यूरो रिपोर्ट
आपको यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे कि नौकरी पेशा और वह भी बेरोजगार लेकिन सरकार की नजर में यह बात सही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं मुख्यमंत्री युवा संबल योजना की जिसके जरिए राजस्थान प्रदेश के बेरोजगारों को हर महीने लगभग ₹4000 का बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। अब सरकार को यह खबर लगी है कि इनमें से कई युवा नौकरी लगने के बावजूद भी बेरोजगारी भत्ते का लाभ उठा रहे हैं और ऐसे लोगों की वजह से जो सही मायने मे वांछित बेरोजगार है और जिनको यह भत्ता सही मायने में मिलना चाहिए, वह इस लाभ से वंचित हो रहे हैं। अब रोजगार विभाग ने ऐसे युवाओं पर नजर रखनी शुरू कर दी है और यह काम अंदर खाने शुरू भी हो गया है। श्रम कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के शासन सचिव नीरज के पवन के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस बार बेरोजगारी भत्ते के लाभार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी की थी। गहलोत ने अपने बजट भाषण में इस संख्या को 1 लाख 60 हजार से बढ़ाकर दो लाख कर दिया था यानी कि अब इस साल 40000 और बेरोजगारों को इस भत्ते का लाभ मिलेगा लेकिन विभाग इस से पहले उन युवाओं की छंटनी करेगा जो कि नौकरी मिलने के बावजूद बेरोजगारी भत्ते का लाभ उठा रहे हैं। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के जरिए पुरुष अभ्यर्थियों की राशि 3000 से बढ़ाकर 4000 कर दी गई है वहीं एसटी एससी महिला, दिव्यांग और थर्ड जेंडर को 35 सौ के बजाए पैतालीस सौ रुपए की राशि जाएगी। बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने के लिए स्नातक होना जरूरी है और आयु भी 30 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।


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