ब्यूरो रिपोर्ट।
जी हां, जनता अभी नहीं समझ पा रही है कि यह महामारी उनसे चाहती क्या है। लोगों को बस अपने काम निपटाने हैं। येन केन प्रकारेण मेरा काम हो जाए और बाद में मुझे कोई लेना देना नहीं। ये जो भावना शादियों के सीजन में सामने आ रही है, वह वास्तव में बहुत खतरनाक है। राज्य सरकार ने गाइडलाइन की पालना नहीं करने पर अधिकतम 25000 का जुर्माना तय कर दिया है यदि आपने शादी के दौरान गाइडलाइन की पालना नहीं की तो अधिकारी आपके यहां पहुंचेंगे और तुरंत 25000 की रसीद काट देंगे। अब लोगों ने इसको उल्टे ही लिया है यानी कि मैं जब लाखों रुपए शादी में खर्च कर रहा हूं तो 25,000 जुर्माना भी भर दूंगा। ये जो नई भावना लोगों के सामने आई है, वास्तव में खतरनाक स्थिति की ओर इशारा कर रही है। तमाम प्रयासों के बावजूद आम जनता इस महामारी की भयानकता को समझ ही नहीं पा रही। लोगों को अपने काम निपटाने की ऐसी जल्दी है कि वह पांच पांच शादियां एक साथ कर रहे हैं। यह सामने भी आया है। हाल ही के उदाहरण देखें तो धड़ाधड़ जुर्माने भरे जा रहे हैं लेकिन क्या सिर्फ जुर्माना भरना ही इस महामारी को रोकने की दिशा में कारगर कदम साबित होगा। अब यह सवाल सबके मन में खौल रहा है। खास तौर से ग्रामीण इलाकों में लोग अभी तक इस महामारी को समझ ही नहीं पाए हैं कि हमारा यह जो कदम उठाया गया है वह समाज, प्रदेश और देश के लिए इतना भयानक सिद्ध होगा। लोगों को इसकी समझ भी नहीं है। बस एक बात बैठ गई है कि जुर्माना भरना है और अपना काम निपटाना है यानी कि जब मैं एक समारोह में लाखों रुपए खर्च कर रहा हूं तो मेरे लिए 25000 जुर्माने की रकम कोई ज्यादा नहीं। अब राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस निर्णय लेना होगा कि लोगों की इस भावना को किस हद तक काबू में किया जाए नहीं तो यह महामारी आने वाले दिनों में औऱ भी भयानक परिणाम सामने लाएगी।


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