जयपुर, राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मंत्री रमेश मीणा और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी आपस में भिड़ गए.. दरअसल रमेश मीणा की सीट पर बोलने के लिए माइक नहीं होने का मामला इतना तूल पकड़ गया कि स्पीकर सीपी जोशी ने यहां तक कह दिया कि अगर मेरी बात नहीं मानते हैं तो फिर मुझे इस पद से हटा दीजिए... वही रमेश मीणा को सदन में तो बोलने का मौका नहीं मिला लेकिन सदन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की आवाज को सदन में दबाया जा रहा है.
बतादे राजस्थान विधानसभा में आज प्रश्नकाल उस समय हंगामेदार हो गया जब पूर्व मंत्री रमेश मीणा और स्पीकर सीपी जोशी ही आपस में भिड़ गए दरअसल रमेश मीणा अपने प्रश्न के समय ही पानी के मुद्दे पर भी बोलना चाहते थे तो सीपी ने उनको मना कर दिया... इसके बाद सीपी ने रमेश मीणा को पीछे की सीट पर जाकर माइक से बोलने के लिए कहा तो रमेश मीणा ने कहा कि मेरी सीट पर माइक नहीं है लेकिन मैं तो यहीं से ही बोलूंगा..
इसके बाद सीपी जोशी ने रमेश मीणा को सवाल पूछने की इजाजत नहीं दी और फटकार लगाते हुए कहा कि इस तरह का आचरण बर्दाश्त नहीं है.. अगर मुझ पर विश्वास नहीं है तो कोई नया अध्यक्ष सुन लीजिए मुझे खुशी होगी.. सीपी जोशी ने कहा कि मुझे खेद है कि विधायक नियमों का पालन नहीं करते.. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में बैठने की व्यवस्था अध्यक्ष नहीं करते बल्कि पार्टी के चीफ करते हैं.
कोविड-19 बैठने की व्यवस्था इस तरह की की गई है जिससे कई सीटों पर माइक नहीं है..अगर सीटों पर माइक नहीं है वह पीछे जाकर बोल सकते हैं... सीपी ने कहा कोई विधायक अध्यक्ष को यह डिटेक्ट करें कि मैं तो यहीं से पूछ लूंगा तो यह बर्दाश्त नहीं होगा...वही सचिन पायलट खेमे के कांग्रेसी विधायक रमेश मीना ने कहा कि विधानसभा के नए सिटिंग अरेंजमेंट से विधायक परेशान है..
कोरोना की आड़ में एससी- एसटी विधायकों से भेदभाव हो रहा है...रमेश मीना ने कहा कि एससी-एसटी विधायकों को एक लाइन में बैठाया गया है.. विधानसभा में 50 से अधिक एससी-एसटी के विधायकों से भेदभाव क्यों हो रहा है?पहली बार के विधायकों को सही सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन वरिष्ठ विधायकों के पास सीट और माइक जैसी व्यवस्थाएं नहीं है...सीपी जोशी और रमेश मीणा के बीच करीब 8 मिनट तक तीखी बहस चलती रही..
इस दौरान सीपी जोशी ने न केवल रमेश मीणा को बल्कि अन्य मंत्रियों और विधायकों को सदन के नियमों का उल्लंघन करने पर जमकर खरी खरी सुनाई... उन्होंने कहा कि मैं अपेक्षा करता हूं कि सरकारी पक्ष भी अध्यक्ष की व्यवस्था और नियमों का पालन करें...
लेकिन खेद का विषय है कि मंत्रियों को जीरो अवर में सदन में रहने की व्यवस्था दी गई है.. इसके बावजूद मंत्री सदन में नहीं रहते... सीपी जोशी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने मुझे चुना है और आप चाहे तो मुझे हटा दे मुझे उससे खुशी होगी...उन्होंने कहा कि मुझे कई बार मंत्री से सवाल करने पड़ते हैं तो मंत्री नाराज हो जाते हैं क्योंकि जनता के पैसे का सदुपयोग नहीं हो रहा हो तो मुझे सवाल करने पड़ते हैं...उल्लेखनीय है इस विधानसभा सत्र में यह पहला मौका था जब कांग्रेस सरकार से बर्खास्त किए गए किसी मंत्री ने अब विधायक के तौर पर सदन में सवाल पूछा था लेकिन विवाद के कारण रमेश मीणा को प्रश्न पूछने का मौका नहीं मिल पाया.


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