सीकर से शादाब सिद्दीकी की रिपोर्ट,

जी हां... सीकर शहर में चौबीसों घंटे शराब की खुलेआम बिक्री होती है। हालांकि ये कोई नई और चौकाने वाली बात नही है। सीकर शहर में पूरी रातभर शराब की बिक्री होना वो भी खुलेआम धड़ल्ले से, ये वाकई सीकर पुलिस के लिए आम बात है। हालांकि सरकार ने सवेरे 10 बजे से रात्री 8 बजे तक शराब की बिक्री के लिए समय निर्धारित कर रखा है। लेकिन सीकर में एक लंबे अरसे से सरकार के आदेशों की कोई पालना होती नजर नही आ रही है। सबसे मजेदार बात ये है कि पुलिस के आला अधिकारियों को जब देर रात में धड़ल्ले से हो रही शराब की बिक्री की सूचना दी जाती है तो शराब माफिया के विरुद्ध कार्रवाई करने की बजाय सूचना देने वाले के ही गले पड़ जाते है।








आखिर ये कैसी कानून व्यवस्था है ? बिलकुल एक ऐसा ही वाकिया नजर आया सीकर शहर के चांदपोल इलाके में। ये इलाका शहर कोतवाली थाना इलाके में आता है। एक शराब की दुकान से पूरी रात भर ग्राहकों को शराब खुलेआम बेची जा रही थी। राह गुजरते एक पत्रकार ने देखा और स्टिंग ऑपरेशन करने वो अपनी कार से उतरा और शराब की दुकान तक पहुंच कर मजबूरन एक बीयर की बोतल खरीदी। बोतल पर MRP 160 रुपये लिखा हुआ था। लेकिन रात काफी हो चुकी थी इसलिए दुकानदार ने 200 रुपये मांगे। यानि 160 के बदले 200 रुपये। दुकानदार से जिद्द हुई तो जवाब मिला कि लेना है तो लो नही तो फूटो यहां से। अब आप अंदाजा लगा सकते है कि एक शराब की दुकान चलाने वाला शख्स उसकी इतनी बड़ी हिम्मत कि लेना है तो मुंह मांगी रकम दो नही तो चलते बनो और उसको इस बात का कत्तई डर नही था कि वो रात 8 बजे बाद शराब की खुलेआम बिक्री कर रहा है। हकीकत ये भी है कि रात 8 बजे बाद बिकने वाली शराब की दिन के मुकाबले कहीं ज्यादा खपत होती है।मामला आईने की तरह साफ है कि दुकानदार को पुलिस की शह है इसीलिए वो इतना बेखौफ होकर इस तरह का जवाब दे रहा है।जब एक पत्रकार ने रात 11 बजे कोतवाली थानाधिकारी कन्हैया लाल को उनके मोबाइल पर सूचना दी कि साहब रात काफी हो गई है उसके उपरांत भी शराब की दुकान खुली है और शराब की बेखौफ बिक्री हो रही है। कोतवाल कन्हैया लाल ने जवाब दिया कि मैं कैमरे दिखवाऊंगा। अब कोतवाल साहब को ये नही पता कि आखिर कैमरे किसके देखना है और क्यों देखना है ? किसी अपराध की सूचना मिल रही है तो मौके पर तुरंत पहुंचे और नियमानुसार कार्रवाई करे।
पत्रकार ने कहा कि साहब हमने देर रात तक हो रही शराब की बिक्री का अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया है। आप देखना चाहें तो देख सकते है। इतने में ही कोतवाल साहब एक पत्रकार पर भड़क गए और झल्लाकर कहा कि रखिये अपने पास वीडियो को और दूकान मैंने नही खोल रखी है। 
अब यहां सवाल ये पैदा होता है कि कोतवाल साहब सूचना देने वाले को उल्टा ये कह रहे है कि दुकान मैंने नही खोल रखी है।वाह... कोतवाल साहब वाह...ये कैसी पुलिसिंग है आपकी ..?? ये तो चलो एक शराब की बिक्री का मामला है जनाब.... कल को आपके इलाके में कोई बड़ी घटना कारित हो जाती है या लूटमार या कोई किसी का मर्डर हो जाता है तो क्या आप सूचना देने वाले को ये कहेंगे कि मैंने मर्डर किया है क्या । ये है हमारी सीकर की पुलिस का रवैया। ये सच है कि सीकर जिले में गैंगवार चरम सीमा पर है और इसके पीछे मुख्य कारण शराब ही रही है। ये हकीकत भी है कि शराब ही अपराध की मुख्य जड़ होती है। दूसरी ओर विश्वस्त सूत्रों से ये जानकारी भी मिल रही है कि रात 8 बजे बाद शराब की खुलेआम बिक्री अगर होती है तो उसमें स्थानीय पुलिस की शह होती है वो इसलिए कि शराब की हर एक दुकान से बंधी और पीने के लिए फ्री की बोतलें उनको समय समय पर परोसी जाती है।कहने को तो सरकार ने रात 8 बजे तक ही शराब की बिक्री करने की छूट दे रखी है लेकिन हकीकत ये है कि पूरी रातभर शराब खुलेआम बिकती है और इसका विरोध करने वालों को ही उल्टा पुलिस की डांट सुननी पड़ती है। वो इसलिए कि उनकी नीचे की होने वाली कमाई में सूचना देने वाला रोड़ा अटका रहा होता है। तो ऐसे में भला उन्हें ये सब बर्दाश्त कैसे हो सकता है।