जयपुर से विशेष संवाददाता अवनीश पाराशर की रिपोर्ट।


राजस्थान में दिनोंदिन कोविड-19 वापस से अपने दोबारा से पैर पसारने लगा है। कोविड के बढ़ते मामलों को लेकर खुद मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी अलर्ट मोड पर नजर आ रहे हैं और जरूरी आदेश निकाले जा रहे हैं ।लेकिन इन आदेशो की हकीकत में कितनी पालना हो रही है यह तो मौके पर देखने के बाद ही पता चलता है।




दरअसल जयपुर कलेक्टर ने आदेश निकाले है।अगर कोविड प्रोटोकॉल तोडा गया तो कोंचिग सेंटर बंद कर दिये जायेगे।कोचिंग सेंटरों में सिर्फ 50 प्रतिशत विधार्थियों को ही बुलाने की अनुमति दी गई है।साथ ही विधार्थियों को कोचिंग सेंटर के अंदर और बाहर लगे थड़ी - ठेलों पर एकत्रित होने पर भी पाबंदी लगाई गई है।जिला कलेक्टर ने निर्देशित करते हुए कहा है कि ऑनलाइन शिक्षा मॉड्यूल बनाने की भी बात कही है। कोविड नियमों की पालना की हिदायत देने के साथ ही कक्षाओं को सैनिटाइज करने और बना मास्क के विद्यार्थियों को कक्षा में अंदर नहीं आने के भी निर्देश दिये गए हैं।लेकिन सोचने वाली बात यह है की राजधानी के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों मे असल में क्या हो रहा है और क्या चल रहा है, यह किसी से छुपी बात नही है। कहीं पर भी सेनेटाइजर की व्यवस्था नहीं है।सोशियल डिस्टेंसिंग की खुलेआम धज्जियां उठ रही है।मास्क विधार्थी लगाकर आ रहे है या नही इस पर किसी का ध्यान नही है। सरकारी/ निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटर मे टेंपरेचर नापने की थर्मो गन नही है। जो नौजवान कोचिंग मे पहुंच रहे है वो तो फिर भी शरीर में इम्यूनिटी बनाये हुए हैं। लेकिन वे मासूम जो 6 कक्षा से 12 कक्षा तक के विधार्थी है।उनको अपने हाल पर छोडा हुआ है।सरकार के यह आदेश अभिभावकों को सोचने पर मजबूर करते है। हकीकत यह है कि पूरे राज्य मे कक्षा 1 से 5वी कक्षा तक की क्लास भी धड़ल्ले से चल रही है। अब बात यह है की जयपुर कलेक्टर द्वारा दिया गया यह आदेश खुद के वातानुकूलित कमरे में बैठे हुए दिया हुआ आदेश है जिसका धरातल की हकीकत से कम और रस्म अदायगी से ज्यादा ताल्लुक है। हाँ यह बात भी स्पष्ट है कि कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा की नीयत एकदम साफ है।