जयपुर से मुकेश शर्मा की खबर।


हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की 2021-22 की आबकारी पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका बुधवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है और वह इसमें दखल नहीं दे सकते। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश लकी वाइंस की याचिका पर दिया। मामले में पिछले दिनों पक्षकारों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला बाद में देना तय किया था। याचिका में कहा था कि 2020-21 में आबकारी पॉलिसी में सरकार ने लिखा था कि इस पॉलिसी में एक साल के लिए लाइसेंस जारी होगा। लेकिन लाइसेंस को और एक साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रार्थी लाइसेंस धारक है और 2020-21 की आबकारी नीति के तहत उसके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया है। 


अब 2021-22 की पॉलिसी में नए सिरे से दुकानों की नीलामी की जा रही है। यदि राज्य सरकार की मंशा एक साल की होती तो वह यह नहीं लिखती कि इसे एक साल और बढ़ाया जा सकता है। राज्य सरकार नई आबकारी पॉलिसी में यही बात दोहरा रही है और अपनी पिछली पॉलिसी में जो बात कही थी उस पर टिकी नहीं है। जबकि लाइसेंसधारकों को उम्मीद थी कि उनका नवीनीकरण किया जाएगा। वहीं सरकार का कहना था कि शराब का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और अदालत आबकारी पॉलिसी में दखल नहीं दे सकती। अदालत ने सरकार की दलीलों से सहमत होकर याचिका खारिज कर दी।