चाहे हम! कितने ही हाईटेक क्यों ना हो जाए? कभी-कभी हमारे इर्द-गिर्द! ऐसे नजारे दिखाई देते हैं कि हमें यह डिजिटल दुनिया भी बोझिल सी नजर आने लगती है। और फिर अचानक सामनेआने लगते हैं हमारे सामाजिक और पारिवारिक सरोकार! यहां हम बात कर रहे हैं दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद की।

जिन्होंने हत्या के प्रयास करने के आरोप में पेश हुए आरोपी को सजा देने के बजाय एक अलग ही फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपी को जुर्म के बदले गुरुद्वारा बंगला साहिब में 1 महीने तक सेवा करने के निर्देश दिए । जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने क्रोध के आवेश में आकर हत्या के प्रयास जैसा जुर्म किया है और इससे पहले इस के चरित्र की फाइल भी बेदाग है तो जेल के बजाय इसे आध्यात्मिक शरण की जरूरत है। 

यदि 1 महीने गुरुद्वारे की सेवा करेगा तो इसके क्रोध पर काफी हद तक नियंत्रण होगा। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद के इस फैसले की चर्चा सिर्फ देश की राजधानी दिल्ली नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है। हालांकि यह मामला मीडिया में उतनी सुर्खियां नहीं बटोर पाया जितनी कि इसे जरूरत थी।