अजमेर. कोरोना वारियर्स को सुविधाएं देने को लेकर सरकार भले ही बड़े बड़े वादे करें लेकिन जमीनी हकीकत इससे कुछ अलग ही है। कोरोना रोग से ग्रसित होकर मौत के मुंह में समाने वाले लोगों के शव को जब परिजन हाथ लगाने से घबरा रहे थे उस समय में एक एंबुलेंस ड्राइवर ऐसा था जो शव को जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी से ले जाकर श्मशान में अंतिम संस्कार करवाता था।
इसके लिए उसे नगर निगम ने परमानेंट नौकरी व एक शव के 2000 रुपए देने का वादा किया था लेकिन अब तक एंबुलेंस ड्राइवर आकाश उर्फ शुभम को 1 रुपया भी नहीं मिल सका है । आकाश अपने मानदेय के लिए पिछले कई महीनों से नगर निगम के चक्कर काट रहा है लेकिन कोई भी अधिकारी उसकी सुनने तक को तैयार नहीं है यूं तो आकाश को गत वर्ष 15 अगस्त पर कोरोनावरियर्स के रूप में नगर निगम सम्मानित कर चुका है
लेकिन अब जब आकाश के भूखे मरने की नौबत आ रही है तो नगर निगम उसकी सुध तक नहीं ले रहा है आकाश ने बताया कि उसने अब तक 188 शव का अंतिम संस्कार करवाया है अब उसके पास इतनी राशि भी नहीं है कि वह उसकी एंबुलेंस को चला सके ऐसे में उसने एंबुलेंस भी खड़ी कर दी है और जैसे तैसे अपना पेट पाल रहा है आकाश ने नगर निगम प्रबंधन को खुली चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उसके बकाया 3 लाख 76 हजार रुपए नहीं दिए जाते हैं तो वह नगर निगम में जाकर आत्महत्या कर लेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी नगर निगम प्रबंधन की होगी।
आकाश की मानें तो तत्कालीन नगर निगम उपायुक्त गजेंद्र सिंह रलावता ने उसे उसका मेहनताना व नौकरी दिलवाने का वादा किया था वह अब रिटायर हो चुके हैं तो उसमें निगम के उपायुक्त खुशाल यादव से भी गुहार लगाई लेकिन उन्होंने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
अजमेरसे नवीन वैष्णव की खबर


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