कभी-कभी सरकारी महकमे के कारिंदों की ऐसी कार्यप्रणाली सामने आती है कि आम जनता यह सोचने को मजबूर हो जाती है कि वास्तव में क्या सरकारी महकमे के कर्मचारी अपने काम को लेकर गंभीर रहते हैं। कुछ ऐसा ही वाकिया आया विधानसभा में बजट  पास करते समय जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने जवाब में आंगनबाडी और प्रेरक सहित संविदा कर्मियों के वेतन में 10% की बढ़ोतरी की घोषणा की थीं । 

इस घोषणा के बाद! पिछले 4 साल से घर बैठे प्रेरक अचंभित हो गए। क्योंकि राज्य सरकार ने 2017 में ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थी। यह प्रेरक साक्षर भारत योजना के बंद होते ही घर बैठ गए थे। 

अब जब उन्हें यह खबर लगी कि नौकरी से हटने के बावजूद उनका वेतन 10% बढ़ा दिया गया है तो वह भी अचंभित रह गए। प्रेरकों का कहना है कि जब उन्हें मानदेय ही नहीं मिल रहा। तो ऐसे में 10% की बढ़ोतरी कैसे संभव है? राजस्थान प्रेरक संघ के। प्रवक्ता रूप चंद गुर्जर ने इस बाबत सवाल उठाया है।