आगामी 15 मार्च को एक बार फिर देश भर में शादियों की धूम रहेगी। जी हां, फुलेरा दूज के दिन हजारों जोड़े परिणय सूत्र बंधन में बंधेंगे। अकेले प्रदेश के ही माने तो एक अनुमान के मुताबिक इस दिन ढाई हजार शादियां होगी। 

इस सब के बीच एक रिपोर्ट आई है जो अब मीडिया की सुर्खियों में भी है। संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़े संगठन यूनिसेफ की एक रिपोर्ट कोविड-19। ए ग्रेट टू प्रोग्रेस अगेंस्ट चाइल्ड मैरिज में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इस दशक में बाल विवाह तेजी से बढ़ रहे हैं और रिपोर्ट के अनुसार दशक के अंत से पहले 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं। 

खतरनाक बात यह है कि रिपोर्ट में इसमें 5 देशों को उजागर किया गया है जिनमें से एक भारत भी है। यह रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि दुनिया भर की लगभग 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ और यह प्रक्रिया कोविड-19 के बाद अब तेजी से बढ़ने लगी है। 

इन 5 देशों में बांग्लादेश, ब्राज़ील, इथोपिया और भारत सहित नाइजीरिया भी शामिल है। रिपोर्ट की माने तो दुनिया की तीन में से एक बालिका वधू भारत में रह रही है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की शादी जल्दी करने और युवावस्था में होने वाली मौत के बीच भी सीधा संबंध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में गर्भावस्था की जटिलताएं और प्रसव होना उनकी जल्द मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। 

आपको बता दें कि बाल वधूओ के बच्चों में शिशु मृत्यु दर का खतरा भी ज्यादा रहता है। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद हमारे सामाजिक ताने-बाने में जो जागृति का माहौल हम समझ रहे थे, उसे लेकर एक बार फिर भ्रम की स्थिति या यूं कहें संदेह की स्थिति पैदा हो गई है।