अरे बारे रे अरे बाबा रे कोई बचाओ रे! कुछ ऐसे ही पीडा दायक शब्द हमें सुनाई देते हैं। इन दो महिलाओं के जो समाज की वहशियाना करतूत का शिकार बन गई ।।।।। जी हां! टोंक जिले में एक ही परिवार में हुई इस पाशविक हरकत का जब वीडियो वायरल हुआ तो समाज का समझदार तबका भी जड़ होकर रह गया।
पास आपस रिश्तेदारी में मां बेटी का बंधन लिए यह महिलाएं। जब अपने ही परिवार की गैर कानूनी हरकतों का विरोध करने पहुंची तो उनके ही परिजनों ने इस राक्षसी या यूं कहा जाए कि मानवीय रिश्तो को शर्मसार करते हुए एक निहायत ही नीच हरकत को अंजाम दे दिया। उफ l lll ये कारगुजारी करते हुए उनके हाथ नहीं कांपे ।।।।।क्या उन्होंने यह सोचकर! कदम उठाया कि हम जो कर रहे हैं, वो वाजिब है और उससे भी बुरी बात यह कि उनके इस कदम में महिलाओं का ही साथ देना। यह दर्शा गया कि इस डिजिटल युग में भी हम पशुओं की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
फरवरी के दिन घटी यह घटना लगभग एक महीने बाद उजागर हो गई। इस घनघोर पीड़ादायक हरकत के बाद पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई लेकिन नतीजा वही हमेशा की तरह ढाक के तीन पात। पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।और इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद होने के ठीक 1 महीने बाद या यूं कहूं कहें कि महिला दिवस का धूम धड़ाका संपन्न होने के बाद एक महिला का महिलाओं की ओर से किया जा रहा यह अत्यंत पीड़ा जनक दृश्य सबके सामने उजागर हो गया।
अब बस घटना को उजागर होने के बाद देश के अखबार और प्रतिष्ठित चैनल कुछ भी कहे लेकिन राजकाज की टीम! यह सब कुछ देख कर एक बस यही बात कहना चाहती है कि यह दृश्य देखकर हम आज भी यह सोचने को मजबूर हैं। क्या वाकई हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं हमारे निचले तबके में क्या विकास की गंगा बह रही है। क्या शिक्षा और आर्थिक विकास हमारे इस तबके तक पहुंचा है? इन सब बातों का जवाब यह दृश्य हमें सिर्फ नहीं के रूप में देते हैं ।।। अभी नहीं।।।।
अभी नहीं ।।।।। अभी नहीं।ः।।।। तो फिर हम ऐसा क्या सोचे कि? जिसको सबसे ज्यादा जरूरत है। इस विकास की वह विकास शिक्षा, अर्थ और तकनीकी रूप से इस तबके तक पहुंच क्यों नहीं पाता जिससे कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके? आप और हम सब? यह गौर करके सोचे कि कमी कहां है वास्तव मे कमी कहां है और ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।
अभी नहीं ।।।।। अभी नहीं।ः।।।। तो फिर हम ऐसा क्या सोचे कि? जिसको सबसे ज्यादा जरूरत है। इस विकास की वह विकास शिक्षा, अर्थ और तकनीकी रूप से इस तबके तक पहुंच क्यों नहीं पाता जिससे कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके? आप और हम सब? यह गौर करके सोचे कि कमी कहां है वास्तव मे कमी कहां है और ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।
राजकाज न्यूज....



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