जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) में 10 साल पहले हुई 154 शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर बनी RPSC के पूर्व चेयरमैन प्रो.बीएम शर्मा की कमेटी ने क्लीन चिट दे दी है।
कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.केएल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आनन-फानन में सिंडिकेट की बैठक बुलाई गई। बैठक में एकमात्र एजेंडे के तौर पर प्रोफेसर शर्मा कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा की गई।
बैठक शुरू होते ही सदस्यों ने इस पर मुहर लगा दी। इधर सिंडिकेट में पारित होने के बाद भर्ती में चयनित हुए शिक्षकों ने राहत की सांस ली है।
2012-13 में हुई थी शिक्षक भर्ती
दरअसल जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में साल 2012-13 में 154 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इस भर्ती में 114 असिस्टेंट प्रोफेसर थे। बाकी एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर थे। इस भर्ती को लेकर विवाद भी हुआ था। भाजपा सरकार के समय प्रोफेसर पीके दशोरा कमेटी को जांच सौंपी गई।
कमेटी ने असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में गड़बड़ियां मानी थी। जून 2018 में राजभवन ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय को दशोरा कमेटी की रिपोर्ट को सिंडिकेट में रखने को कहा था। लेकिन विश्वविद्यालय ने रखा नहीं।
इसके बाद कांग्रेस सरकार आई तो नवंबर 2019 में प्रोफेसर बीएम शर्मा के नेतृत्व में नई जांच कमेटी बनाई गई। इस कमेटी का पिछले साल 1 साल के लिए कार्यकाल बढ़ाया गया था जो 30 जून को समाप्त होना था।
कमेटी ने जांच में पूर्व में बनी दशोरा कमेटी की रिपोर्ट को अनदेखा कर दिया। जबकि कमेटी ने भर्ती में अनियमितताओं की पुष्टि की थी। अब प्रोफेसर शर्मा ने अपनी रिपोर्ट जब सरकार को सौंपी तो यूनिवर्सिटी ने गुरुवार को आनन-फानन में सिंडिकेट बुलाकर रिपोर्ट को अनुमोदित कर दिया।
गौरतलब है कि प्रोफेसर शर्मा जांच कमेटी के दौरान ही तत्कालीन कुलपति रहे प्रोफेसर पीसी त्रिवेदी ने सभी 114 असिस्टेंट प्रोफेसर को स्थायी कर दिया। राजभवन के आदेश से बर्खास्त हुए 34 शिक्षकों को भी बहाल कर दिया। इन सभी निर्णयों में यूनिवर्सिटी ने एक लाइन जोड़ दी कि सभी निर्णय हाई कोर्ट के निर्णय के अधीन रहेंगे।


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