राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद जयपुर नगर निगम में कांग्रेस के पार्षद पिछले 48 घंटों से अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे हुए हैं। भास्कर ने पूरे मामले पर महापौर मुनेश गुर्जर से बात की। उन्होंने कहा- यह धरना अब पार्षदों की स्वाभिमान की लड़ाई बन चुका है। क्योंकि जिस तरह से अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा ने मुझे और पार्षदों को धमकाया है। उन्होंने मुझसे कहा गुर्जर आरक्षण में मैंने काफी लोगों को मरवा दिया। महिला पार्षदों के साथ बदतमीजी और अभद्रता करेगा। हम भी उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे। हम इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा- इस पूरे मामले को लेकर मैंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक भी अपनी बात पहुंचाई है। हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी मांग को सुनकर राजेंद्र वर्मा को बर्खास्त किया जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं बोर्ड और पद से इस्तीफा दूंगी। इसके साथ ही आखरी सांस तक वर्मा के खिलाफ धरने पर बैठी रहूंगी।
राजेंद्र वर्मा ले रहा था, मंत्री प्रताप सिंह का नाम
उन्होंने कहा- हमने सरकार के दो मंत्री महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास तक अपनी बात पहुंचाई है। इसमें महेश जोशी तो खुद निगम मुख्यालय आए थे। जहां हमने उन्हें अपनी समस्या बताई। वहीं, प्रताप सिंह खाचरियावास से मेरी फोन पर बात हुई। मैंने उन्हें बताया कि राजेंद्र वर्मा आपका नाम ले रहा है।
आखरी सांस तक लडूंगी लड़ाई
इसके साथ ही विधायक अमीन कागजी और रफीक खान से भी हमने अपनी समस्या पहुंचा दी है। ऐसे में हमें पूरी उम्मीद है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते वह हमारी समस्या को समझेंगे। ऐसे में मुझे पूरी उम्मीद है कि राज्य सरकार तक हमारी मांग पुरजोर तरीके से पहुंची होगी। वैसे भी साच को आच नहीं होती। इसलिए जब तक राजेंद्र वर्मा को बर्खास्त नहीं किया जाता। हम सब पार्षद आखरी सांस तक यही धरने पर बैठे रहेंगे।
राजेंद्र वर्मा ने मुझे धमकाया बोले- गुर्जरों को मरवा चूका हूँ
एक वीडियो गलत तरह से वायरल किया जा रहा है। जिसके लिए कहा जा रहा है कि मैं राजेंद्र वर्मा को धमका रही हूं। लेकिन मेरी वाणी पर मेरा पूरा संयम है। जो भी वीडियो है। मैं खुद कहूंगी आप उसे देखें और अच्छे से चलाएं। क्योंकि मैं कभी भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं करती हूं। जहां तक बात रही धमकाने की। जिस तरह के शब्द राजेंद्र वर्मा ने इस्तेमाल में लिए है। उसके बाद स्वाभाविक है कि मैं आराम से बात नहीं कर सकूंगी। क्योंकि उन्होंने तू-तड़ाक से बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने कहा- तुम्हारा दम दिखाओ। इसके बाद भी जब में चुप रही। उन्होंने मुझसे कहा गुर्जर आरक्षण में मैंने काफी लोगों को मरवा दिया। वह महिला पार्षदों के साथ बदतमीजी और अभद्रता करेगा। तो हम भी उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देंगे।
जनता की समस्या पर सवाल कर क्या कोई गुनाह कर दिया
मुनेश ने कहा- मैंने सिर्फ उनसे यही पूछा था कि आपने उस फाइल को 15 दिन तक आखिर क्यों रोका। उसमें अगर उन्हें कुछ भी समस्या थी। उन्हें अपनी समस्या लिखनी थी, या उसका समाधान करना था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बल्कि, फाइल को आखिरी वक्त तक अटका कर बैठ गए। जबकि इससे पहले उन्होंने ही फाइल पर कई बार हस्ताक्षर कर चेक किया। क्योंकि वही अध्यक्ष हैं। उनकी शर्तों के बिना वह फाइल आगे नहीं बढ़ सकती थी। ना ही टेंडर हो सकता था। ऐसे में अगर हमने उनसे कारण पूछ लिया। तो कौन सा गुनाह कर दिया।
वर्मा मेरी सीट पर बैठकर बोले- मैं चला लूंगा निगम
महापौर ने कहा राजेंद्र वर्मा यहीं नहीं रुके। बल्कि, मेरी सीट पर जाकर बैठ गए। वहां बैठकर पार्षदों से बोल रहे हैं, निगम मैं चला लूंगा। सामान्य सी बात है। इस तरह के घटनाक्रम में हम कैसे चुप रह सकते है। मेरे से पहले पार्षदों ने वर्मा से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने पार्षदों से बात नहीं की। इसके बाद मैंने उन्हें फोन किया। उन्होंने मेरा फोन नहीं उठाया। इसके बाद विधायक अमीन कागजी ने भी अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा को फोन किया। लेकिन वर्मा ने अमीन कागजी साहब का भी फोन नहीं उठाया। इसके बाद वह लगातार बदतमीजी करते रहे। तो हम इसे कैसे सहे।
नियमों के विपरीत फाइल पर वर्मा ने किया साइन
मुनेश ने बताया- मानसून आने वाला है। इसलिए शहर की जनता परेशान ना हो। इसी वजह से हम यहां धरना दे रहे हैं। अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा ने मानसून से पहले बाढ़ नियंत्रण को लेकर जो कक्ष स्थापित होता है। उसका टेंडर 15 जून को होने वाला था। उन्होंने टेंडर करने की जगह पुराने टेंडर को ही 3 दिन आगे बढ़ा दिया। नियमों के तहत उसमें नगर निगम आयुक्त के भी साइन होने चाहिए थे। लेकिन बिना आयुक्त के साइन के ही राजेंद्र वर्मा ने गैरकानूनी तरीके से पुराने टेंडर को आगे बढ़ा दिया। इसके बाद मैंने नगर निगम आयुक्त राजेंद्र सिंह शेखावत को फोन कर भी राजेंद्र वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। लेकिन अब तक आयुक्त ने वर्मा पर कोई कार्रवाई नहीं की।
बारिश को लेकर निगम ने अब तक नहीं की कोई तैयारी
उन्होंने कहा- आज अगर जयपुर में बारिश आती है। शहर की सड़कों पर पानी भर जाता है। तो नगर निगम के पास उसे दुरुस्त करने की व्यवस्थाएं तक नहीं है। यह जिम्मेदारी नगर निगम के आयुक्त की और अतिरिक्त आयुक्त की बनती है। लेकिन वह दोनों तो जनता की सुनवाई ही नहीं कर रहे। इसलिए अब पार्षद जनता की लड़ाई लड़ने के लिए धरने पर बैठे हुए हैं।
मैं यह बातें तथ्यों के आधार पर कह रही हूं। मेरे पास राजेंद्र वर्मा की कारगुजारी की फाइलें मौजूद हैं। जिसमें उन्होंने गड़बड़ की है। जहां तक बात है मेरी, तो मैं बस यही कहूंगी कि सच्चाई की नाव डगमग हो सकती है। लेकिन डूब नहीं सकती है।
मुझ पर लगे आरोप तथ्यहीन
मुनेश गुर्जर के आरोप पर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र वर्मा ने कहा- महापौर द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से तथ्य हीन है। मैंने इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल ही नहीं किया। मैं तो महापौर और पार्षद सभी की पूरी इज्जत करता हूं। कल भी हर दिन की तरह नगर निगम में काम करने जाऊंगा। यह सारा विवाद एक सामान्य फाइल को लेकर हुआ है। जो रूटीन प्रोसेस है।
पार्षद बोले- झूठ बोल रहे वर्मा
पार्षद उमरदराज ने कहा- राजेंद्र वर्मा झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने महापौर और पार्षदों को धमकाया है। उन्होंने कहा कि निगम में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। अधिकारी जनता की सुनवाई नहीं कर रहे। ऐसे में आखिर अब हम जाए तो जाए कहां। 48 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत गया है। जयपुर के जनप्रतिनिधि जनता के हक की लड़ाई के लिए धरना दे रहे हैं। वही अधिकारी छुट्टियां मनाने में व्यस्त हैं।
जबकि मानसून सर पर आ गया है। चार दिवारी में नाला सफाई जैसे मूलभूत काम भी पूरे नहीं हुए हैं। जो जयपुर की जनता के लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए मैं बस यही मांग करता हूं कि जल्द से जल्द राजेंद्र वर्मा के खिलाफ कार्रवाई कर शहर की बिगड़ी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।
पार्षदों ने वर्मा को कमरे में कर दिया था बंद
दरअसल, नगर निगम के पार्षदों को उनके इलाकों में पांच अस्थायी कर्मचारी दिए जाते हैं। इसके लिए अतिरिक्त आयुक्त के निर्देशन में गठित टीम टेंडर प्रक्रिया निकालने वाली थी। पार्षदों का आरोप है कि राजेन्द्र वर्मा पिछले 15 दिन से टेंडर नोटशीट पर साइन नहीं कर रहे हैं। जबकि क्षेत्र में मानसून को देखते हुए कर्मचारियों की आवश्यकता है। 15 दिन बाद शुक्रवार को 50 पार्षद महापौर के पास गए और टेंडर नोटशीट पर साइन कराने की बात कही।
इस पर महापौर मुनेश गुर्जर ने अतिरिक्त आयुक्त वर्मा को अपने ऑफिस में बुलाया। जब वह नहीं पहुंचे तो पार्षद शाम 6 बजे अतिरिक्त आयुक्त को जबरन महापौर के कक्ष में ले आए। जहां महापौर और पार्षदों ने अतिरिक्त आयुक्त से फाइल पर साइन करने के लिए कहा। इसके बाद वर्मा की महापौर और पार्षदों से बहस हो गई। इससे नाराज पार्षदों ने राजेंद्र वर्मा को महापौर कक्ष में बंद कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद शाम करीब 7:15 बजे मंत्री महेश जोशी नगर निगम पहुंचे और दोनों पक्षों को सुना। लेकिन, मामला नहीं सुलझ पाया। महेश जोशी के रवाना होने के कुछ देर बाद अतिरिक्त आयुक्त भी पुलिस की मौजूदगी में भारी विरोध के बावजूद नगर निगम मुख्यालय से निकल गए। हालांकि इसके बाद भी शुक्रवार रात से अब तक महापौर मुनेश गुर्जर के साथ पार्षद नगर निगम मुख्यालय में ही धरने पर बैठे हैं।


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