चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के कारण राजस्थान में हुई भारी बारिश और बाढ़ से मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पाली में रविवार रात 2 लोगों की पानी में बहने से मौत हो गई।
पाली में अलवर निवासी 37 साल के मनोज यादव स्कॉर्पियो में जा रहे थे। फालना थाना एरिया के बेडल गांव के पास सड़क पर बहकर आ रहे बरसाती पानी में उनकी गाड़ी बह गई। हादसे में डूबने से उनकी मौत हो गई। रेस्क्यू कर शव और गाड़ी को भी निकाला गया है। वहीं, इसी तरह फालना के शिवाजी नगर निवासी 50 साल के पकाराम पुत्र जेकाराम जोगी घर के पास नाले में बह गया।
पिछले तीन दिन में इस आपदा से 7 लोगों की जान जा चुकी है। रविवार को डूबने और चट्टान के नीचे दबने से 4 लोगों की और 17 जून को एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
बिपरजॉय को अरब सागर से आए अब तक के तूफानों में सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जा रहा है। ये लगातार 13 दिन एक्टिव रहा। इससे सबसे ज्यादा बारिश हुई। यही कारण है कि मानसून के आने से पहले राजस्थान में पहली बार बाढ़ देखने को मिली है।
जालोर, सिरोही, बाड़मेर और राजसमंद में बाढ़ के कारण हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की मदद लेनी पड़ी। मानसून से पहले बरसाती नदियां उफान मारने लगी। बांधों में पानी की आवक शुरू हो गई। पिछले 24 घंटे के दौरान अजमेर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सिरोही,उदयपुर समेत कई जगह भारी से अतिभारी बारिश दर्ज हुई।
18 इंच बरसात ने मचाई तबाही
इस चक्रवात के कारण सबसे ज्यादा बरसात जालोर में हुई। यहां 36 घंटे के दौरान (17 जून सुबह 8:30 बजे से 18 जून शाम 8:30 बजे तक) 456MM यानी 18 इंच बरसात हुई है। इसी तरह आहोर (जालोर) में 471, भीनमाल 217, रानीवाडा 322, चितलवाना 338, सांचोर 296, जसवंतपुरा 332, बागोडा में 310 और सायला में 411MM बरसात रिकॉर्ड हुई है। इस कारण जालोर में हालात बेकाबू हो गए। हजारों लोगों को एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की मदद से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।
20 से ज्यादा चक्रवात पिछले 12 साल में आए, लेकिन सबसे प्रभावशाली बिपरजॉय
मौसम केन्द्र नई दिल्ली की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011 से 2023 तक अरब सागर में 20 से ज्यादा च्रकवात आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावशाली और सबसे ज्यादा लम्बे समय तक एक्टिव रहने वाला चक्रवात बिपरजॉय है। 6 जून को ये चक्रवात डिप्रेशन के रूप में अरब सागर में शुरू हुआ था, जो बाद में डीप डिप्रेशन, साइक्लोन स्ट्राम, सीवियर साइक्लोन स्ट्राम, वैरी सीवियर साइक्लोन स्ट्रॉम, एक्ट्रीमली सीवियर साइक्लोन स्ट्रॉम में कन्वर्ट हुआ। इससे पहले अक्टूबर 2018 में आया चक्रवात "लुबान' 10 दिन और अक्टूबर-नवंबर 2019 में आया चक्रवात "क्यार' 10 दिन तक एक्टिव रहा था।
भारी बारिश के कारण ट्रेनें रद्द, रूट बदलकर चलाया
जालोर, सिरोही, राजसमंद समेत कई जगह भारी बारिश के कारण सड़क और रेल मार्ग प्रभावित हो गया। रेलवे ने जोधपुर से होकर जालोर के रास्ते जाने वाली 11 ट्रेनों का संचालन 19 जून तक रद्द कर दिया है। जबकि तीन ट्रेन को मारवाड़ जंक्शन, पालनपुर होकर संचालित किया। वहीं उदयपुर-अजमेर के रूट पर चलने वाली 10 से ज्यादा गाड़ियां आधा से लेकर 2 घंटे तक की देरी से संचालित हुई।
आज इन जिलों में अलर्ट
जयपुर मौसम केंद्र ने आज टोंक, बूंदी, कोटा, बारा, दौसा, सवाईमाधोपुर, करौली में भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों के लिये ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जबकि अजमेर जयपुर भीलवाड़ा, चित्तौड़, झालावाड़, धौलपुर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
डिप्रेशन से लो प्रेशर एरिया में बदलेगा...
मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक 19 और 20 जून को बिपरजॉय का असर भरतपुर, कोटा संभाग के जिलों में रहेगा। चक्रवात और कमजोर होकर डिप्रेशन से लो प्रेशर एरिया में कन्वर्ट होगा। चक्रवात अभी 10km प्रति घंटा की स्पीड से नॉर्थ-ईस्ट दिशा की तरफ आगे बढ़ रहा है।
बाड़मेर में बारिश का 25 साल का रिकॉर्ड टूटा
बाड़मेर में 25 साल बाद पहली बार एक ही दिन में इतनी बारिश हुई है। सिवाना में बीते 48 घण्टे में रिकॉर्ड 234 एमएम बारिश दर्ज की गई है। समदड़ी व बालोतरा में रुक-रुक कर 40 घंटे तक बारिश होती रही। जिले के चौहटन, सेड़वा और धोरीमन्ना में 12-12 इंच बारिश हुई है।
बाड़मेर जिले का सबसे बड़ा मेली बांध में 10 फिट से ज्यादा पानी आ गया है। प्रशासन एनडीआरएफ के साथ मुख्यालय पर मौजूद है। आर्मी के जवानों की टीम भी सिवाना में तैनात की गई है। इलाके की कई नदियां व नाले उफान पर हैं। बारिश से कई कच्चे मकान ढहे हैं।
जालोर : भीनमाल में 39 लोगों को NDRF ने रेस्क्यू किया
जालोर जिले के भीनमाल में रेलवे स्टेशन के पास स्थित नीबाली नाले के पास कटाव होने से पानी रेलवे स्टेशन होते हुए निचले इलाकों में घुस गया। निंबाली नाला ओवरफ्लो होने से शहर के कृषि मंडी रोड, हरिजन बस्ती, खेतावत मार्केट, तलबी रोड सहित कई बस्तियों में पानी घुस गया। एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम ने अब तक 39 लोगों को बाहर निकाला है।
पाली में 17 घंटे बरसे मेघ, 2 की मौत
पाली शहर में शनिवार रात करीब 10 बजे शुरू हुई बरसात रविवार दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर थमी। भारी बारिश से शहरभर में कई सड़कें टूट गई, बिजली के पोल टूट गए, वहीं करंट लगने से दो लोगों की मौत हो गई। जिले के जवाई बांध और हेमावास बांध में बारिश से पानी की अच्छी आवक हुई। लेकिन कई गांवों का आपस में संपर्क टूट गया। जिले में दो लोगों की तूफान और बारिश के चलते मौत भी हो गई है। लगातार हुई बारिश के चलते पाली जिले के अधिकांश क्षेत्रों में 17 घंटे तक लाइट गुल रही।
कुंभलगढ़ में जोरदार बारिश के बाद बिगड़े हालात
कुंभलगढ़ क्षेत्र में शनिवार रात से बारिश शुरू हुई। रविवार शाम तक 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज हुई। केलवाड़ा में दर्जियों मोहल्ले में एक कच्चा मकान भी गिर गया, हालांकि कोई जन हानि नही हुई है। कुंभलगढ़ रोड में रॉक वैली होटल का गार्डन खाई में ढह गया। दरअसल, होटल का गार्डन खाई के किनारे बना था। इसके आगे का आधे से ज्यादा हिस्सा अलग हो गया।
लगातार हो रही बारिश के चलते परशुराम महादेव मार्ग और वेरो का मठ आसपास क्षेत्र में गाड़ी से आ रहे पानी के कारण झरने चलने लग गए हैं।
माउंट आबू की नक्की झील ओवर फ्लो, 24 घंटे में 360MM बरसात
सिरोही जिले में सबसे ज्यादा 360MM बारिश माउंट आबू में दर्ज हुई। यहां की प्रसिद्ध नक्की झील ओवर फ्लो हो गई। सिरोही, शिवगंज, रेवदर इलाकों में कई जगह रोड पर पेड़ गिर गए हैं, तो कहीं पर बिजली के पोल गिर गए हैं। शिवगंज तहसील मुख्यालय पर भी 24 घंटे हुई मूसलाधार बरसात से बाढ़ के हालात हो गए। शिवगंज में 315MM बारिश दर्ज हुई है। रेवदर तहसील में 243MM बारिश से कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। वहीं गोशाला में करीब 10 गायों की मौत हो गई। इसके अलावा आबूरोड में 203MM, देलदर में 20MM, पिंडवाड़ा में 176MM और सिरोही में 125.6MM बरसात दर्ज की गई है।
चार जिलों में भयंकर तबाही, 20 हजार से ज्यादा बिजले के पोल उखड़े
आपदा राहत विभाग के सचिव पीसी किशन ने बताया कि तूफान से जनहानी नहीं हुई है लेकिन भयंकर बारिश से चार जिलों बाड़मेर, जालोर, पाली, सिरोही में बाढ़ आ गई। यहां एक ही दिन में इतनी बारिश हुई है जो पूरे साल की बारिश से 20 गुना ज्यादा है। बचाव के लिए एनडीआरएफ की 4 टीमें और एसडीआरएफ की 30 टीमें इन जिलों में लगाई गई हैं।
स्टेट कंट्रोल रूम को मिली सूचना के मुताबिक चार जिलों में 20 हजार से ज्यादा बिजली के पोल उखड़े हैं। यानी औसतन हर जिले में 5000 के आसपास बिजली के पोल उखड़े हैं। वहीं कच्चे मकानों के ढहने की संख्या 2000 से ज्यादा हो सकती है। मवेशियों की मौत के आंकड़े अभी नहीं आए हैं।



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