भरतपुर ब्यूरो रिपोर्ट। 

भरतपुर में अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े युवक को नीचे उतारने के लिए कैबिनेट मंत्री ने हाथ में माइक लेकर इस तरह गुहार लगाई। अपील का असर भी हुआ। कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह को देख युवक नीचे उतर आया और मंत्री के पैर पकड़ लिए।

दरअसल भरतपुर शहर के प्रिंसनगर इलाके में रहने वाला युवक राधेश्याम सिंह उर्फ गौरव (23) शनिवार सुबह 7 बजे कोतवाली थाना इलाके में स्थित सरसों मंडी की पानी की टंकी पर चढ़ गया था। सबसे पहले रेलवे चौकी पुलिस के चौकी इंचार्ज राकेश मान को युवक के टंकी पर चढ़ने का पता चला।


चौकी इंचार्ज ने अधिकारियों को दी सूचना

चौकी इंचार्ज राकेश मान ने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद सीओ सिटी नरेंद्र कुमार और कोतवाली थाना इंचार्ज दिनेश कुमार जाप्ते के साथ मौके पर पहुंच गए। थोड़ी देर में एसडीआरएफ की टीम के जवान बचाव सामग्री लेकर टंकी के नीचे पहुंचे और जाल फैला दिया।

पुलिस के अधिकारियों ने माइक और लाउड स्पीकर से राधेश्याम से नीचे उतरने की अपील की लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। वह एक ही बात कहता रहा कि जब तक राज्य सरकार मुझे अनुकंपा नियुक्ति नहीं देगी, मैं टंकी से नीचे नहीं आऊंगा।

सुबह 11.30 के करीब कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह को युवक के टंकी पर चढ़े होने की सूचना मिली तो वे कार से मौके पर पहुंचे। तब तक एसडीएम देवेंद्र परमार भी सरसों मंडी पहुंच चुके थे। वहां पहुंचे कैबिनेट मंत्री ने माइक हाथ में लिया और गौरव को आवाज दी।

मंत्री की अपील पर उतर आया युवक

मंत्री ने कहा- गौरव, देख मैं बूढ़ा आदमी हूं, हार्ट का पेशेंट हूं, मैं सीढ़ियां नहीं चढ़ सकता, ऊपर आऊंगा तो दिक्कत हो जाएगी। नीचे आजा। मंत्री को आया देख युवक गौरव उर्फ राधेश्याम सीढ़ियां उतरता हुआ नीचे आ गया और कैबिनेट मंत्री के पैर छुए।

मंत्री ने राधेश्याम के कंधे पर हाथ रखा और कहा कि नौकरी मिल जाएगी, तसल्ली रख, किसी पर विश्वास रखा कर। ऐसी गलती आइंदा मत करना। अब हाथ जोड़कर पूरे प्रशासन से माफी मांग। युवक ने पुलिस अधिकारियों से माफी मांगी। मंत्री ने कहा- अब आराम से घर जा, खाना खा, और सो...

टंकी पर क्यों चढ़ा युवक

राधेश्याम के पिता जवाहर सिंह CRPF में थे। 7 नवंबर 1999 को उनका निधन हो गया था। राधेश्याम ने बताया कि फील्ड ऑपरेशन के लिए नीमच (एमपी) से रांची (झारखंड) जाते पिता को दिमागी बुखार चढ़ा और उनका निधन हो गया। पिता को सेना ने शहीद का दर्जा नहीं दिया। उस वक्त मैं सिर्फ 3 महीने का था।

पिता की मौत के बात मां माया देवी ने मुझे पाला। सेना में पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए मेरा 18 साल का होना जरूरी था। 2019 में मैं 18 साल का हो गया। इसके बाद CRPF ने मुझे भर्ती में बुलाया। लेकिन भर्ती के दौरान में फिजिकली अनफिट घोषित कर दिया गया। मुझे टीबी की शिकायत बताई गई। जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल में चेकअप कराया तो टीबी नहीं निकली।

इसके बाद CRPF ने 2020 में राज्य सरकार को एक पत्र लिखा, जिसमें मुझे राज्य सरकार में LDC की नौकरी देने की सिफारिश की गई। मैं LDC की नौकरी के लिए तैयार हो गया। लेकिन 3 साल चक्कर काटने के बावजूद राज्य सरकार मुझे LDC की नौकरी नहीं दे रही है।

3 साल से काट रहा मंत्रियों-विधायकों के चक्कर

राधेश्याम ने बताया कि वह इन तीन साल में कई मंत्रियों, विधायकों, जन सुनवाई कार्यक्रमों, जनता दरबारों में जाकर गुहार लगा चुका है। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कहा गया कि गृहमंत्री नियमों में शिथिलता देंगे तो नौकरी मिलेगी।

8 दिन पहले राधेश्याम ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए जिला कलेकट्रेट के बाहर धरना भी दिया था। लेकिन तब भी उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद से वह परेशान था। शनिवार को सुबह 7 बजे वह घर से निकलकर सरसों मंडी स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया और 5 घंटे तक वहीं बैठा रहा।

राधेश्याम ने बताया कि पिता के निधन के बाद मां ने कई मुसीबतें झेलकर पाला। उम्मीद थी कि सेना में नौकरी लगेगी तो गुजारा होगा। लेकिन सेना से निराशा हाथ लगने के बाद राज्य सरकार ने भी निराश किया। अब कैबिनेट मंत्री ने मौखिक आश्वासन दिया है।