स्मार्ट सिटी मिशन में पिछड़ रहे जयपुर शहर के कारणों को लेकर स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यहां तीन-तीन मंत्री और छह-छह विधायक हैं। ये ही सबसे बड़ी समस्या है। दरअसल, मंत्री धारीवाल गुरुवार को उदयपुर दौरे पर थे। यहां 180 करोड़ की लागत से सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर रेती स्टैंड स्थित आवरी माता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में समारोह का आयोजन किया गया था।
यहां धारीवाल ने कहा- हर कार्य की मॉनिटरिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि जयपुर बहुत बड़ा शहर है, लेकिन पिछड़ रहा है। प्रदेश में स्मार्ट सिटी में चार शहर कोटा, अजमेर, जयपुर व उदयपुर लिए गए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ काम जयपुर का है। उन्होंने कहा कि मैं वहीं का हूं, लेकिन मै कुछ नहीं कर सका। वहां तीन-तीन मंत्री, छह-छह विधायक है। यही सबसे बड़ी प्रॉब्लम है। अगर न मंत्री होते, न विधायक होते तो काम समय पर पूरे हो जाते हैं।
चुटकी लेकर बोले- अलग-अलग मत को लेकर उलझ जाता है काम
धारीवाल ने चुटकी लेकर कहा कि उन मंत्री-विधायकों के आपसी विवाद जो पैदा हो जाते हैं, इसलिए काम अटक जाते हैं। वो कहता है कि यह योजना लाओ, वो कहता यह योजना लाओ, इसको बदलो, इसको करो, इसको करो उसी में मामला उलझता जाता है। फैसला करने वाला एक व्यक्ति हो और उसका आदेश चलता हो तो निश्वित तौर पर वह काम भी समय पर पूरा होता है।
धारीवाल बोले- मैं सबसे ज्यादा परेशान सीवरेज के काम से और ठेकेदारों से हूं
समारोह में जैसे ही सीवरेज के काम समय पर हो जाए यह बात आई तो धारीवाल बोले कि जितने भी सीवरेज के काम आज राजस्थान में चल रहे हैं वो मेरा विभाग देखता है। अगर सबसे ज्यादा परेशान किसी बात से हूं तो सीवरेज के काम से हूं और इनके ठेकेदारों से हूं।
धारीवाल बोले कि चाहे यह कार्य आरयूआईडीपी से कराया जाए, रूडसिको से कराए, नगर पालिकाओं से कराए जाए, प्राधिकरणों या यूआईटी से कराए जाए, ये सबसे ज्यादा मुश्किल काम है। सीवरेज काम करवाना और इसको वक्त पर समाप्त कर देना बहुत बड़ी चुनौती होती है। इससे पहले उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा था कि यह कार्य समय पर पूरे हो जाए, इस बात का पूरा ख्याल रखा जाए।
मीडिया से बोले- कॉर्डिनेशन की वजह से आती है समस्या
धारीवाल के इस बयान के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की। उनके इन बयान को लेकर जब सवाल किया गया तो वे बोले- कई बार आपस में काॅर्डिनेशन नहीं होने की वजह से यह समस्या होती है। जयपुर ही नहीं जहां-जहां कॉर्डिनेशन नहीं होगा, वहां पर योजनाएं पिछड़ेगी। जयपुर इसलिए पिछड़ रहा है कि बात को बैठकर कोई तय ही नहीं किया जाता है। इसलिए मुझे दु:ख होता इस बात का।
कटारिया बोले: कोटा की तुलना में उदयपुर कमजोर पड़ता
कार्यक्रम में असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि उदयपुर नगर निगम में बोर्ड किसी भी पार्टी का भी हो हम शहर के विकास के लिए मिलकर काम करते हैं। कटारिया बोले कि हम कोटा से उदयपुर की तुलना करते हैं तो हम कमजोर पड़ते हैं, धारीवाल की तरफ देखते हुए बोले कि आप इशारे में समझ गए होंगे मैं क्या कहना चाहता हूं।
कटारिया बोले- देश में नंबर वन का शहर उदयपुर टूरिस्ट पॉइंट की दृष्टि में बने इसके लिए हमारी भी मदद कीजिए इस शहर के लिए। ऐसा होगा तो उदयपुर से राजस्थान की इकॉनोमी पर बहुत फर्क पड़ेगा।
मई 2025 तक पूरा होगा कार्य
उदयपुर में अमृत 2.0 के फेज प्रथम के तहत 180.53 करोड़ रुपए की लागत से नए सीवरेज सिस्टम का काम होगा। यह काम 11 मई 2025 तक पूरा किया जाएगा। शहर में 152 किमी सीवरेज लाइन का काम किया जाएगा, 18 हजार 620 हाउस में सीवरेज कनेक्शन हो सकेंगे। योजना के तहत शहर के 14 वार्डों में सीवरेज लाइन डाली जाएगी।इससे पूर्व असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और धारीवाल नेइस कार्य का शिलान्यास किया।
अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं धारीवाल
एक साल पहले: धारीवाल ने रेप के मामलों पर कहा था- 'रेप के मामले में हम नंबर एक पर है, अब ये रेप के मामले क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है...हंसते हुए आगे कहा था- वैसे भी यह राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश रहा है यार, उसका क्या करें'? यह कहकर धारीवाल फिर हंसे तो कई मंत्री और कांग्रेस विधायक भी हंसने लगे थे। धारीवाल विधानसभा में पुलिस और जेल की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब दे रहे थे।
2 साल पहले: कोटा के एक कार्यक्रम में कहा था-मैं ब्राह्मणों से कहता हूं, तुमने यार बुद्धि का ठेका ले रखा है। मेरे यहां कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। उनका जो रिजल्ट आता है, उसमें 100 में से 70 बनिया कैसे आते हैं? तुम लोग कैसे पीछे रह जाते हो? इसका जवाब नहीं है उनके पास। आप उठाकर देख लेना कभी भी। कोटा के इंस्टीट्यूट का जब रिजल्ट आता है तो उसमें जिंदल मिलेगा, जैन मिलेगा या अग्रवाल मिलेगा। इस तरह के नाम मिलेंगे आपको।
3 महीने पहले: विधानसभा में कहा था- सदन में कहा था कि रोहिताश लांबा की पत्नी का देवर तो पहले से शादीशुदा था। उसके दो बच्चे हैं। फिर वो उसके नाते चली गई। अब नाते जाकर कहती है कि मेरे देवर को नौकरी दो। भाई वाह, अजीब तमाशा है। देवर को नौकरी दो। कहीं ऐसा हुआ है। नियमों के खिलाफ किसी को नौकरी मिल गई हो।



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