सीकर ब्यूरो रिपोर्ट।
जीणमाता आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। क्योंकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही जीणमाता से काजल शिखर मंदिर तक रोप-वे सेवा शुरू होने वाली है। जीणमाता का रोप-वे वीर हनुमान सामोद मंदिर के बाद शेखावाटी का पहला रोप-वे होगा।
वन विभाग से भूमि डायवर्जन के बाद एजेंसी ने जीणमाता में रोप-वे निर्माण का काम शुरू कर दिया है। रोप-वे का काम शिव प्राइम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड फर्म को सौंपा गया है। वन विभाग के आमीन मूलचंद के अनुसार रोप-वे के लिए भूमि डायवर्जन की सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एजेंसी को रोप-वे के लिए कुल 0.63 हैक्टेयर भूमि डायवर्जन कर निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
रोप वे निर्माण का 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कार्य योजना के मुताबि 2024 में प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए रोप-वे की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। प्रोजेक्ट पर करीब आठ करोड़ की लागत आएगी। जनवरी 2024 में न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए रोप-वे की सुविधा भक्तों के लिए शुरू की जा सकती है।
रोप-वे पर 1 घंटे में 500 श्रद्धालु कर सकेंगे सफर
फर्म के प्रबंध निदेशक नीतेश कुमार ने बताया कि रोपवे की लंबाई 270 मीटर तय की गई है। रोप-वे में एक साथ 6 ट्रॉलियों का संचालन होगा। एक ट्रॉली में 6 श्रद्धालुओं को सफर कराया जाएगा। यानी प्रति घंटे रोप-वे से सफर करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 500 के करीब रहेगी। रोप-वे के अपर व लोअर स्टेशन पर 700 श्रद्धालुओं की वेटिंग सुविधा के लिए वेटिंग हॉल का निर्माण भी करवाया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को कैंटीन, जलपान व विश्राम की सुविधा भी मुहैया करवाई जाएगी।
जीणमाता में हर साल आते करीब 20 लाख श्रद्धालु
देशभर से करीब 20 लाख श्रद्धालु सालाना जीणमाता के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्र के समय मेले में करीब 10 लाख श्रद्धालु जीणमाता के दर्शन करते हैं। इनमें महज 20 प्रतिशत श्रद्धालु ही 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित काजल शिखर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच पाते हैं। शेष श्रद्धालु पहाड़ी की ऊंचाई देख काजल शिखर के दर्शन किए बिना ही लौट जाते थे। 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ने के लिए 1000 मीटर चलना पड़ता है।
जीणमाता मंदिर से 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित काजल शिखर मंदिर तक पैदल जाने में श्रद्धालुओं को करीब 1000 मीटर चलना पड़ता है। आने-जाने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है। खास बात ये है कि रोप-वे शुरू होने के बाद जीणमाता से प्राचीन काजल शिखर मंदिर आने-जाने में श्रद्धालुओं को महज पांच मिनट का ही समय लगेगा। क्योंकि रोप-वे की क्षमता के अनुसार 270 मीटर वन साइड सफर में ढाई मिनट लगेंगे। ऐसे में आने-जाने में श्रद्धालुओं को महज पांच मिनट का समय लगेगा।


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