कोटा ब्यूरो रिपोर्ट।  

प्रदेश में बिजली उत्पादन की कई इकाइयां ठप पड़ी हैं। साथ ही पावर प्लांट्स जनसंसाधन के लिए जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश के 10 उत्पादन निगमाें में तकनीकी कामगारों के 58% से 75% तक पद खाली हैं। कर्मचारियाें की यह कमी गर्मी में कभी बड़े संकट का कारण बन सकती है। प्रदेश में इन निगमाें में 2694 पद स्वीकृत हैं, इन पर 1150 ही तकनीकी कामगार कार्यरत हैं। जबकि, 1544 पद रिक्त हैं। इसमें 681 कार्मिकाें के पद भरे जाने प्रस्तावित थे, लेकिन अभी तक भरा नहीं गया है।

काेटा थर्मल में 1990 के बाद नहीं भर्ती : सुपर थर्मल पावर काेटा में 1990 के बाद काेई भर्ती नहीं हुई। यहां तकनीकी कामगाराें के 760 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 495 खाली हैं। इसी उत्पादन वृत्त काेटा में 192 तकनीकी कामगार स्वीकृत हैं। इनमें से 130 पद खाली पड़े हैं। 62 पद भरे हैं। इसी तरह की स्थिति सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की है। यहां भी 813 पदाें में से 354 पद खाली पड़े हैं। अधिकांश जगह ठेके पर कर्मचारी लगा रखे हैं। इनके पास अनुभव की कमी है। जिसके चलते साइट बंद होने की स्थिति बनी रहती है।

सभी जगह इकाइयां बंद : प्रदेश के सभी बिजली घराें में कई इकाइयां अभी बंद हैं। काेटा थर्मल में भी 7 में से एक इकाई बंद पड़ी है। झालावाड़ में 4 में से 2 इकाइयां ठप पड़ी हुई हैं। सबसे बड़े पावर स्टेशन सूरतगढ़ 6 इकाइयों में से 2 बंद पड़ी हुई है। धाैलपुर की ताे पूरी इकाइयां बंद हैं। इसी तरह की स्थिति बाड़मेर की है।

केजुअल्टी का डर

रामसिंह शेखावत, अध्यक्ष, राजस्थान विद्युत कर्मचारी संघ, काेटा

अधिकांश जगह स्थिति खराब है। मैन पावर की कमी के चलते इकाइयां बंद पड़ी हैं। अधिकांश कार्मिक ठेके पर हैं, जिनके पास अनुभव नहीं है। जिसके चलते केजुअल्टी की आशंका रहती है। जाे ठेका कार्मिक हैं उनका भी मानदेय कम है। लगातार शाेषण हाे रहा है। वहीं, बेराेजगार संघ के जिला अध्यक्ष मनाेज धावसलिया का कहना है कि प्रदेश में आईटीआई उत्तीर्ण कितने ही अभ्यर्थी बेराेजगार हैं। यहां भर्ती निकले ताे कई बेराेजगाराें काे नाैकरी मिल सकती है।