अफ्रीका की एक शांत और परिपक्व नदी एक स्थान पर पहुंच कर गरजती उफनती नदी का रूप लेकर यकायक जबरदस्त तांडव करती है। अफ्रीका की इस चौथी सबसे बड़ी नदी का नाम है जांबेजी। यह नदी हिंद महासागर में सबसे ज्यादा पानी डालती है। जांबिया जिम्बाब्वे सीमा पर यह नदी एक राजसी गति से प्रवाहित होती है। करीब 1.6 किलोमीटर चौड़ी यह नदी अचानक एक बड़ी चट्टान से नीचे गिरती है। नदी की चौड़ाई अचानक 60 मीटर की हो जाती है जिसके कारण पानी एक पतली चादर के रूप में अत्यधिक वेग और अथाह शक्ति के साथ नीचे गिरता है। यह दृश्य अत्यधिक रोमांचकारी होता है क्योंकि कोई पांच लाख चालीस हजार टन पानी प्रति मिनट नीचे की तरफ अत्यधिक तीव्रता से प्रवाहित होता है। यह अथाह पानी विश्व की सबसे चौड़ी चट्टान रूपी एक मील के किनारे से नीचे गिरता है। इस पानी की चादर पर रोजाना इंद्रधनुष बनते दिखाई देते हैं जब पानी की बूंदे आसमान में उठती हैं। इसीलिए पानी के इस झरने को इंद्रधनुष झरना कहा जाता है।
पानी की अत्यधिक नमी के कारण चारों तरफ शानदार बरसाती वन लगे हुए होते हैं। आगे चलकर जांबेजी नदी अत्यधिक वेग से पतले और अत्यधिक टेढ़े मेढे नालों से इस तरह के बढ़ती है कि स्थानीय लोग इस क्षैत्र को "उबलता बर्तन" बर्तन कहते हैं। विश्व में ऐसा कोई दूसरा स्थान नहीं है जो किसी व्यक्ति को इससे ज्यादा स्तब्ध कर सके। इंद्रधनुष झरने के अलावा यहां दो और सशक्त झरने गिरते है। पानी नीचे टकराकर फिर बूंदों के रूप में 500 मीटर की ऊंचाई तक उछलता है जिसे कोई 40 किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। चूंकि यह पानी धुएं जैसा दिखता है तो स्थानीय लोग इसे मोसी ऑस तुन्या यानि गरजता धुंआ कहते हैं।
1855 में स्कॉटलैंड से एक पादरी चिकित्सक डेविड लिविंगस्टोन यहां पहुंचा था। यूरोप से यहां पहुंचने वाला लिविंगस्टोन पहला व्यक्ति था। उसने इन दैत्याकार झरनों को अपने देश की शासक विक्टोरिया के नाम पर विक्टोरिया फॉल्स दिया। चूंकि नदी का पानी चट्टानों के रूप को बदलता रहता है तो सैकड़ों वर्ष बाद हो सकता है कि आज के विक्टोरिया फॉल्स अपना स्थान बदल लें।




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