अजमेर ब्यूरो रिपोर्ट।

अजमेर में 92 लाख की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। लोन कंपनी की ओर से क्रिश्चयनगंज थाने में मामला दर्ज कराया गया। आरोप है कि प्रोपटी का आवंटन पहले ही निरस्त हो गया और डॉक्यूमेन्ट गिरवी रखकर लोन उठा लिया। जब किश्ते नहीं चुकाई तो प्रोपटी का पजेशन लेने की कार्रवाई शुरू करने पर पता चला। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

श्रीराम फाइनेंस कम्पनी लिमिटेड के प्रतिनिधी राजेश कुमार चौधरी ने रिपोर्ट देकर बताया कि कम्पनी द्वारा एक बंधक ऋण मैसर्स वर्धमान टेलीकॉम (प्रो. संजय कुमार जैन पुत्र ताराचन्द जैन, निवासी महालक्ष्मी मेडिकल के सामने, माकड वाली रोड, वैशाली नगर, अजमेर) को कुल 92 लाख 20 हजार रुपए जरिए एग्रीमेन्ट दिया गया। इस ऋण के लिए मालिकाना हक की सम्पत्ति प्लाट नं. 7, पार्ट ऑफ खसरा नम्बर 1555, अभियन्ता नगर, गांव चौरसीयावास अजमेर क्षेत्रफल 435.55 स्कॉयर यार्ड को मोरगेज रखा गया था। ऋण का गांरंटर दिनेश जैन पुत्र ताराचन्द जैन, निवासी महालक्ष्मी मेडिकल के सामने, माकड वाली रोड, वैशाली नगर, अजमेर था। इन्होने आश्वासन दिया कि यदि उनके द्वारा ऋण चुकाने में कोई चूक की जाती है तो वो मोरगेज सम्पत्ति से ऋण वसूली करने के लिए कम्पनी अधिकृत है। संजय ने सम्पत्ति किसी संजीव कुमार सोगानी से खरीद किया जाना बताया था। असल दस्तावेज कम्पनी में जमा करवाए थे।

ऋण किश्त जमा नही करवाए जाने पर तीन जनवरी 2022 को आर.बी.आई की गाईड लाईन के अनुसार बुक्स ऑफ अकाउण्ट में एन.पी.ए. घोषित कर असरफैसी एक्ट के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रोपटी को पजेशन में लेकर ऋण वसूली की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई। कम्पनी को यह जानकारी हुई कि सम्पत्ति के संबंध में न्यायालय सम्भागीय आयुक्त अजमेर में अपील लम्बित थी। जिस पर न्यायालय ने सम्पत्ति का मूल आवंटन निरस्त कर दिया। इन को इसकी जानकारी शुरू से थी, इसके बावजूद भी इन तथ्यों की जानकारी छिपाई गई और जानबूझकर कम्पनी से ऋण राशि प्राप्त कर धोखाधड़ी की। पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।