जोधपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
हर 3 साल बाद पुरुषोत्तम मास में होने वाली भोगिशेल परिक्रमा जिसे मारवाड़ का महाकुंभ भी कहा जाता है। इस बार कोरोना के कारण 6 साल बाद अपने भव्य रूप में होगी। 100 किलोमीटर से ज्यादा की परिक्रमा यात्रा में एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल होते। इसके रुट में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए नगर निगम प्रशासन फील्ड में उतरा है।
इस बार यह भोगिशेल परिक्रमा जुलाई से अगस्त माह के बीच होगी। इस वर्ष श्रावण मास दो होंगे और उसी में एक पुरुषोत्तम मास गिना जाएगा। उसी पुरुषोत्तम मास में 7 दिन तक यह परिक्रमा की जाती है। इसमें जोधपुर और आसपास के कई प्राचीन और धार्मिक महत्व के मंदिरों की परिक्रमा होती है। जोधपुर में आसपास भोगिशेल पहाड़ पर बने इन धार्मिक स्थलों को परिक्रमा कर लोग शीश नवाते हैं। नगर निगम दक्षिण की महापौर वनिता सेठ में अपनी टीम के साथ उसके रूट का जायजा लिया। यहां आने वाले दिनों में कई कार्य करवाने के लिए अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।
कोरोना के कारण पिछली बार सिर्फ औपचारिकता निभाई
3 साल पहले पुरुषोत्तम मास कोरोना काल के बीच आया था। इसीलिए तब परिक्रमा को भव्य रूप से आयोजित नहीं किया गया, सिर्फ औपचारिकता ही निभाई गई थी। लेकिन अब 6 साल बाद फिर उसी रूप में इस परिक्रमा को आयोजित करने की तैयारी चल रही है।
यह है भोगिशेल परिक्रमा की खासियत
- हर 3 साल बाद पुरुषोत्तम मास में होती है परिक्रमा।
- 100 किलोमीटर से भी ज्यादा की यात्रा करते हैं भक्त।
- 7 दिन तक चलती है परिक्रमा।
- एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु होते हैं शामिल।
- 6 दिन तक अलग-अलग मंदिरों में होता है लाखों श्रद्धालुओं का पड़ाव।


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