अजमेर ब्यूरो रिपोर्ट।
दवा कंपनी मालिक को गिरफ्तारी की धमकी देकर 2 करोड़ रुपए की घूस मांगने के मामले में आरोपी एसओजी की निलंबित एडिशनल एसपी दिव्या मित्तल को शुक्रवार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। एडवोकेट प्रीतम सोनी ने बताया- हाईकोर्ट जस्टिस सीके सोनगरा की बेंच ने 1 लाख रुपए के मुचलके पर मित्तल को जमानत के आदेश दिए हैं।
इससे पहले मित्तल की जमानत अर्जी पर सुनवाई करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था। दिव्या को एसीबी ने 20 जनवरी को रिमांड के बाद अदालत में पेश कर जेल भेजा था। करीब 100 दिन दिव्या को जेल में रहना पड़ा है। इस मामले में एसीबी ने 22 मार्च को 11500 पेज की चार्जशीट विशेष कोर्ट में पेश की थी। मामले में अभी भी बर्खास्त कॉन्स्टेबल सुमित फरार चल रहा है। जिसकी एसीबी तलाश कर रही है।
ये था मामला
2 करोड़ की रिश्वत मांगने के मामले में जयपुर ACB टीम ने अजमेर में 16 जनवरी को SOG की ASP दिव्या मित्तल को पकड़ा गया था। दिव्या मित्तल को एसीबी की टीम अजमेर से जयपुर लाई थी। इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। दिव्या ने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में हरिद्वार की फार्मा कंपनी के मालिक काे गिरफ्तार नहीं करने की एवज में बर्खास्त पुलिसकर्मी सुमित कुमार के माध्यम से यह घूस मांगी थी।
जहां से शुरू हुई घूसखोरी की कहानी…
दरअसल, ASP दिव्या मित्तल ने नशीली दवाओं की तस्करी को लेकर अजमेर के रामगंज थाने में दो और अलवर गेट थाने में एक मिलाकर कुल 3 FIR दर्ज की थी। तीनों ही मामलों में देहरादून स्थित दवा कंपनी हिमालय मेडिटेक के डायरेक्टर सुनील नंदवानी को आरोपी बनाया था। रामगंज थाने में दर्ज दोनों मामले क्लब कर इन्वेस्टिगेशन चल रही थी और अधिकतर आरोपी इन्हीं मामलों में पकड़े जा रहे थे।
ज्यादा मजबूत केस भी यही (रामगंज थाना) था। इसके बावजूद दिव्या ने नंदवानी को अलवर गेट थाने में दर्ज मामले में कमजोर धाराओं में अरेस्ट किया था। नंदवानी ने कोर्ट में जमानत अर्जी दी तो दिव्या ने कोर्ट से ये तथ्य भी छुपाया कि वो अन्य क्लब मामलों में भी आरोपी है। ऐसे में नंदवानी को हाईकोर्ट से 15 दिन बाद ही आसानी से जमानत मिल गई थी। इसी मामले में दिव्या मित्तल ने 1 करोड़ की घूस ली थी।
ACB की ट्रैप कार्रवाई से पहले दिव्या ने उत्तराखंड के हरिद्वार में दवा फैक्ट्री JPEE ड्रग्स के मालिक विकास अग्रवाल से भी 2 करोड़ की घूस मांगी थी। नशीली दवाओं की सप्लाई में कोई भूमिका नहीं होने के बावजूद दिव्या की धमकियों से परेशान हो विकास अग्रवाल ने एसीबी की शरण ली।


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