कोटा ब्यूरो रिपोर्ट।
कोटा नगर निगम की गौशाला गायों की लिए मौतशाला बन रही है। रोज दस से पंद्रह गायों की मौत यहां हो रही है। इसके पीछे निगम अधिकारियों की लापरवाही है तो गौशालाओं में अव्यवस्थाएं कारण है। लेकिन गौशाला समिति का तर्क है कि निगम की गौशाला में बीमार गायों को लाया जाता है। इसकी वजह से उनकी मौत होती है। निगम की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है नगर निगम की गौशाला में सोमवार को एक ही दिन में 25 गायों को मौत हुई। दस दिन में ही अब तक गौशाला में करीब 190 गायों की मौत हो चुकी है।
निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला में गायों की मृत्यु दर बढ़ रही है। यह स्थिति तब है जब निगम की गौशाला में गायों को हरा चारा व भूसा भी भरपूर मिल रहा है। बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में सामान्य तौर पर 8 से 10 गायों की मौत हर दिन होती रही है। पिछले कई दिन से यह संख्या बढ़कर 15 से 18 के बीच हो गई। शहर को कैटल फ्री अभियान के चलते यूआईटी और निगम लगातार गौवंशों को पकड़कर गौशाला भिजवा रहे हैं। अब यहां रोज गौवंश तो आ रहे हैं लेकिन इन्हें रखने की जगह की भी दिक्कत है। बंधा गौशाला में वर्तमान में 3900 करीब गौवंश है। जबकि यहां दो हजार तक की क्षमता है। ऐसे में यहां गौंवशों को ठूंस कर रखना पड़ रहा है। जिससे इन्हें घूमने तक की जगह नही मिलती है।
समिति का तर्क-आती है बीमार गाय
वहीं गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने गौवंशों की मौतों को लेकर तर्क दिया कि निगम गौशाला में ज्यादातर बीमार गाय आती है। इन गायों में ज्यादातर बाहर कचरा, थैली खाती है ऐसे में इनके पेट में थैली जम जाती है। गौशाला में इन्हें पूरी मात्रा में चारा और भूस मिलता है। पेट में थैलियां जमा होने के चलते इनका स्वास्थ और खराब होता है और एक बार यह बैठ जाए तो फिर उठ नही पाती है। कुछ समय पहले जब गायों की मौत हुई थी तब इनका पोस्टमार्टम करवाया था उसमें भी बड़ी मात्रा में थैलियां निकली थी।
नहीं हो पा रही शिफ्टिंग
निगम गौशाला में गोवंशों की संख्या ज्यादा होने के बाद इन्हें निजी गौशालाओं में शिफ्ट करना था लेकिन वह भी निगम नहीं कर सका। इसके पीछे कारण बताया कि कैटल वाहन खराब पडे़ है। जिसकी वजह से शिफ्ट नहीं कर पाए। निगम गौशाला से सौ सौ गौवंशों को निजी गौशालाओं में शिफ्ट करना है। निगम के विस्तार के लिए जमीन की मांग भी लंबे समय से कर रहे हैं लेकिन वह मांग भी पूरी नही हो रही है।


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