जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।  

राजस्थान में जो 19 जिले नए बनेंगे, वहां की करीब साढ़े 3 करोड़ जनता के पते भी बदल जाएंगे। कई कस्बों के जिला मुख्यालय तो कुछ के संभाग मुख्यालय भी बदल जाएंगे।

ऐसे में सबसे जरूरी होगा अपने आधार कार्ड में पता बदलवाना। इसकी प्रोसेस तो आसान है, लेकिन खर्च खुद की जेब से ही चुकाना होगा। इस पर कितना खर्च आएगा?

इस साल चुनाव होने हैं, तो क्या वोटर आई-डी कार्ड में भी पते बदलवाने होंगे? नए जिलों की प्रोसेस कब से शुरू होगी? मैं जयपुर के मालवीय नगर में रहता हूं तो मेरा जिला कौनसा होगा, जयपुर उत्तर या दक्षिण? क्या जिलों के बाद नए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र भी बनेंगे?

सबसे पहले तो बताते हैं जिलों को बनाने का प्रोसेस कहां तक आगे बढ़ा?
राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने भास्कर को बताया कि सबसे पहले जिलों के सीमांकन का काम है। सीमाएं तय करने के लिए प्रदेश स्तरीय कमेटी और विभाग दोनों कवायद में जुटे हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत स्वयं रोजाना किसी न किसी ऐसे प्रतिनिधिमंडल, संगठनों व लोगों से मुलाकात कर रहे हैं, जो नए प्रस्तावित जिलों व संभाग मुख्यालयों से जयपुर आ रहे हैं। सीएम गहलोत खुद उनसे पूछ कर अधिकारियों को उनकी भावनाओं के अनुसार निर्देश दे रहे हैं कि कौनसा शहर-कस्बा किस जिले व संभाग में शामिल होना चाहिए।

सबसे पहला और जरूरी बदलाव, आधार कार्ड
आज के समय सबसे अहम डॉक्युमेंट आधार कार्ड है, जो घर-घर की जरूरत है। आधार कार्ड में बदलाव के बाद ही बाकी दस्तावेजों में जरूरी चेंज हो सकते हैं। राजस्व विभाग अगले एक से डेढ़ महीने में नए जिलों के सीमांकन का काम शुरू करेगा। लोकसभा, विधानसभा, जिला और संभाग मुख्यालयों से संबंध-संदर्भ भी बड़े पैमाने पर बदल जाएंगे।

जिला बदला तो बदलना ही पड़ेगा आधार कार्ड का एड्रेस
जिला बदलने पर संबंधित लोगों को अपने आधार कार्ड में पता बदलवाना ही होगा। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति का नाम व पता (अरविंद त्रिपाठी, नई नगरी मोहल्ला, मालपुरा जिला टोंक है) तो नया पता कुछ ऐसे होगा अरविंद त्रिपाठी, नई नगरी मोहल्ला, मालपुरा जिला केकड़ी।

कैसे बदलवा सकते हैं आधार कार्ड में पता
आधार कार्ड में पता बदलवाने के लिए एक एफिडेविट बनवाना पड़ता है। उसे एफिडेविट (वैधानिक घोषणा पत्र) में संबंधित व्यक्ति को यह लिखकर देना होता है कि आधार कार्ड में उसके वर्तमान पते को बदलकर नया पता कर दिया जाए। उस एफिडेविट के आधार पर आधार कार्ड में नया पता दर्ज होकर नया आधार कार्ड मिलता है।

5 लोगों की एक फैमिली को खर्च करने होंगे 500 रुपए
प्रत्येक व्यक्ति को एफेडेविट के लिए स्टाम्प (50 रुपए) और 50 रुपए फीस (ई-मित्र और टाइपिंग) का मिनिमम खर्च वहन करना होगा, तब उसके आधार कार्ड में पता परिवर्तित होगा। अगर किसी के घर में पांच सदस्यों का आधार कार्ड है, तो यह खर्च 500 रुपए होगा और अगर 10 सदस्यों के आधार कार्ड हैं, तो यह खर्च 1000 रुपए होगा।

राजस्थान राज्य राजस्व बोर्ड अजमेर (बार एसोसिएशन) के अध्यक्ष एडवोकेट पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड में जिला बदलने पर पता बदलवाना एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आएगा। आधार कार्ड से ही राज्य व केन्द्र सरकार की सारी लोक कल्याणकारी योजनाएं भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में उनका लाभ निरंतर मिलता रहे और वोटर लिस्ट में भी किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आनी चाहिए।

क्या चुनाव से पहले वोटर कार्ड भी नया बनवाना होगा?
प्रदेश के निर्वाचन विभाग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (आईएएस) डॉ. प्रवीण गुप्ता ने भास्कर को बताया कि जिला बदलने पर वोटर कार्ड में पता आसानी से बदला जा सकेगा। निर्वाचन विभाग इसके लिए काम कर रहा है। जैसे ही जिलों का सीमांकन तय हो जाएगा तो हम अपना काम शुरू कर देंगे। किसी भी मतदाता को कहीं कोई परेशानी नहीं आएगी। जिस भी मतदाता का जहां भी मतदान केन्द्र है, वहीं उन्हें वोट डालना है।

मतदाता पहचान सूचियां (पर्चियां) उन्हें मतदान से पहले मिल जाएंगी। विभाग अपने सॉफ्टवेयर के जरिए नए जिलों के हिसाब से अपडेट कर लेगा। मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग आसानी से कर सकेंगे। जिलों का सीमांकन तय होने पर निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर या हेल्पलाइन नंबर-1950 पर संपर्क किया जा सकता है।

जयपुर और जोधपुर को दो हिस्सों में कैसे बांटा जाएगा?
19 नए जिलों में जयपुर उत्तर व जयपुर दक्षिण और जोधपुर पूर्व व जोधपुर पश्चिम भी शामिल है। यह बंटवारा ठीक उसी तरह है जैसे विधानसभा क्षेत्रों में एक ही शहर में अजमेर उत्तर-दक्षिण, बीकानेर पूर्व-पश्चिम या कोटा उत्तर-दक्षिण होता है। अब जिलों में जयपुर और जोधपुर को दो-दो हिस्सों में बांटने का मतलब है जयपुर और जोधपुर में दो-दो कलेक्टर और दो-दो पुलिस अधीक्षक बनाने होंगे।

जयपुर या जोधपुर के नए जिलों में कौनसे क्षेत्र शामिल होंगे कौनसे नहीं? इस सवाल के जवाब में कमेटी के चेयरमैन रिटायर्ड आईएएस रामलुभाया ने बताया कि कमेटी अपना होमवर्क कर रही है। एक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और अब दूसरी फाइनल रिपोर्ट भी जल्द ही सौंपेगी। सूत्रों का कहना है जेडीए रीजन को ही जिलों का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

जयपुर में से चार जिले बनाने का फॉर्मूला

जयपुर के बारे में मोटे तौर पर 5 तरह के फॉर्मूले पर काम चल रहा है।

  1. जयपुर के जेडीए रीजन और नगर निगम क्षेत्र को ही जयपुर जिला करार दिया जाए।
  2. जयपुर के उत्तर में आमेर, चौमूं, हवामहल, आदर्श नगर, विद्याधर नगर, किशनपोल आदि विधानसभा सीटों को मिलाकर जयपुर उत्तर बनाया जाए।
  3. जयपुर के दक्षिण में सांगानेर, बगरू, बस्सी, चाकसू को मिलाकर जयपुर दक्षिण जिला बनाया जाए।
  4. दूदू में सांभर-फुलेरा, बगरू, झोटवाड़ा आदि को मिलाकर दूदू जिला बनाया जाए।
  5. कोटपूतली-बहरोड़ जिले में शाहपुरा, विराटनगर, बहरोड़ व बानसूर को मिलाकर जिला बनाया जाए।

जयपुर दो हिस्सों में कैसे बंटेगा?
जयपुर उत्तर जिला : परकोटा शहर, आमेर, विद्याधर नगर, शास्त्री नगर, बनीपार्क, वैशाली नगर जैसे बड़े क्षेत्रों के साथ सीकर रोड (विश्वकर्मा, हरमाड़ा), दिल्ली रोड से सटे इलाकों (कूकस, अचरोल, जमवारामगढ़) को जयपुर उत्तर में डाला जा सकता है।

जयपुर दक्षिण जिला : वहीं सी-स्कीम, प्रतापनगर, मालवीय नगर, मानसरोवर, महेन्द्रा सेज, जगतपुरा, सीतापुरा, चाकूस, बस्सी तक के क्षेत्रों को जयपुर दक्षिण जिले में जोड़ सकते हैं।

वर्तमान जयपुर जिले में से दूदू और कोटपूतली को जिला बनाने के बाद जो हिस्सा बचेगा उसे जयपुर उत्तर व जयपुर दक्षिण के रूप में बांटा जाएगा। दूदू और कोटपूतली में सांभर, फुलेरा, फागी, विराटनगर, शाहपुरा, जोबनेर आदि को शामिल किया जाएगा।

रामलुभाया ने भास्कर को बताया कि इसके लिए जयपुर की सभी 19 विधानसभा क्षेत्रों, दोनों नगर निगमों (ग्रेटर व हेरिटेज) और जेडीए रीजन का अध्ययन किया जा रहा है।

जल्द ही जयपुर के कलेक्ट्रेट सहित सभी तहसीलों के अधिकारियों, निगम व जेडीए के अफसरों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक भी की जाएगी। यही फॉर्मूला जोधपुर के संदर्भ भी अपनाया जाएगा।

क्या राजस्थान में लोकसभा सीटें बढ़ेंगी?

नहीं, फिलहाल केन्द्र व राज्य सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं हैं। परिसीमन होने पर भी देश में कहीं भी लोकसभा सीटें बढ़ाने को लेकर विचार नहीं चल रहा है। 2008-09 में परिसीमन हुआ था। सीटें तब भी 25 ही थीं और अब भी 25 ही हैं। नाम जरूर कुछ सीटों का बदल गया। जैसे पहले राजसमंद नाम से कोई सीट नहीं थी पर अब है। पहले सलूम्बर नाम से लोकसभा सीट हुआ करती थी पर अब नहीं है।

क्या विधानसभा सीटें बढ़ेंगी?
नहीं, फिलहाल इस विषय में भी कोई विचार नहीं है। राजस्थान में परिसीमन 2008 में हुआ था। इससे पहले 200 भी सीटें थीं अब भी 200 सीटें ही हैं। कुछ सीटों के क्षेत्र जरूर बदले थे। कुछ नई सीटें बनी थीं। कुछ पुरानी सीटें खत्म हो गई थीं, लेकिन संख्या 200 ही रही। उस में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

उदाहरण के लिए जयपुर में बनीपार्क विधानसभा सीट होती थी, अब नहीं है। झोटवाड़ा नाम की कोई सीट पहले नहीं थी पर अब है। विद्याधर नगर और मालवीय नगर नाम की भी कोई सीट पहले नहीं थी अब है। पहले फागी एक अलग विधानसभा सीट थी, लेकिन अब वो दूदू में शामिल है। इसी तरह बगरू नाम से भी कोई सीट नहीं थी पर अब है।

क्या नए जिले और कुछ संभाग और बनाए जाएंगे?
संभावना है, क्योंकि नए जिलों के लिए गठित रामलुभाया कमेटी से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में रिपोर्ट देने को कहा है। इसलिए क्योंकि रामलुभाया कमेटी के पास 60 कस्बों को जिला बनाने की डिमांड आई थी। लेकिन बजट में 19 जिले घोषित हुए। कई क्षेत्र हैं जो जिला बनने की कई शर्तें पूरी भी करते हैं।

बहुत से उपखंड मुख्यालयों जैसे सांभर, सुजानगढ़, उदयपुरवाटी, भिवाड़ी, मालपुरा, भीनमाल, खाजुवाला में आंदोलन चल रहे हैं। वहां भी लोग चाहते हैं कि उनके उपखंड मुख्यालयों को भी जिला बनाया जाए। मालपुरा को जिला बनाने के लिए टोंक के प्रभारी मंत्री सालेह मोहम्मद ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया है। वहीं खाजूवाला के लिए आपदा राहत मंत्री गोविंद राम मेघवाल भी प्रयास कर रहे हैं।

भीलवाड़ा को संभाग मुख्यालय बनाने की मांग खुद राजस्व मंत्री रामलाल जाट सीएम गहलोत से मिलकर कर चुके हैं। देवली (टोंक) अभी अजमेर संभाग में है, लेकिन वहां से कांग्रेसी विधायक हरीश मीना ने राज्य सरकार से देवली को जयपुर संभाग में शामिल करने की मांग की हुई है। जयपुर उत्तर-दक्षिण को लेकर जयपुर में भी दो मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और डॉ. महेश जोशी आमने-सामने हैं। ऐसे में अभी जिलों व संभाग मुख्यालयों का सीमांकन बहुत बड़ी चुनौती है।

नए जिलों से लोकसभा, विधानसभा, संभाग मुख्यालयों भी बदल जाएंगे?
राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं और वर्तमान में 33 जिले व 7 संभाग मुख्यालय हैं। अब 19 नए जिलों व 3 नए संभाग मुख्यालयों के बाद जिले हो गए हैं 50 और संभाग मुख्यालय 10 हो गए हैं, लेकिन लोकसभा व विधानसभा की सीटों की संख्या पहले ही की तरह क्रमश: 25 और 200 ही है। ऐसे में करीब साढ़े 3 करोड़ लोगों के सामने जब तक राज्य सरकार की कोई अधिसूचना जारी नहीं होगी तब तक यह असमंजस बना रहेगा कि जिलों के बदलने के बाद उनकी लोकसभा या विधानसभा सीटों के संदर्भ में कोई बदलाव हुआ है या नहीं।

सांभर फुलेरा की मुसीबत
सांभर और फुलेरा जयपुर से पश्चिम दिशा में क्रमश: 90 और 50 किलोमीटर पर स्थित दो विकसित शहर हैं। यह दोनों राजस्थान के सर्वाधिक विकसित उपखंड मुख्यालय हैं, लेकिन इन्हें जिला नहीं बनाया गया है। जबकि यह वर्तमान जिला मुख्यालय जयपुर से काफी दूर स्थित हैं। इन्हें अब दूदू (नया जिला) में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका दोनों जगहों पर जमकर विरोध हो रहा है।

दूदू विधानसभा सीट : मूलत: अजमेर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जबकि सांभर-फुलेरा जयपुर ग्रामीण लोकसभा में आते हैं। अब अगर सांभर-फुलेरा को दूदू जिले में डाला तो क्या उनका लोकसभा क्षेत्र भी परिवर्तित होगा या नहीं इस पर असमंजस बना हुआ है। सांभर-फुलेरा दोनों ही दूदू से न केवल व्यापारिक, औद्योगिक, रेल-सड़क परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन आदि के हिसाब से बड़े हैं, बल्कि उनका दूदू से किसी तरह का कोई राजनीतिक-प्रशासनिक सम्पर्क भी नहीं रहा है।

मालपुरा के लाखों लोग भी असमंजस में
केकड़ी (अजमेर) को जिला बनाने की घोषणा के बाद से मालपुरा (टोंक) में लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। मालपुरा के वर्तमान विधायक कन्हैयालाल चौधरी सहित पूर्व विधायक सुरेंद्र व्यास, रणवीर पहलवान और जीतराम चौधरी भी मांग कर रहे हैं कि मालपुरा को केकड़ी में शामिल न किया जाए बल्कि मालपुरा को ही जिला बनाया जाए।

वर्तमान में केकड़ी विधानसभा क्षेत्र अजमेर लोकसभा में और मालपुरा विधानसभा क्षेत्र टोंक-सवाईमाधोपुर में आते हैं। ऐसे में अगर मालपुरा को केकड़ी में मिला दिया जाए तो विचित्र स्थिति बनेगी कि मालपुरा के लोग लोकसभा के लिए टोंक में, जिला के लिए केकड़ी में और विधानसभा के लिए मालपुरा के दस्तावेजों के फेर में उलझ जाएंगे। मालपुरा का एक दूसरा बड़ा कस्बा है टोडारायसिंह। टोडारायसिंह अभी तक टोंक जिले में है, लेकिन विधानसभा क्षेत्र मालपुरा में है। ऐसे में मालपुरा के केकड़ी में जाने के बाद टोडारायसिंह के लोग किस विधानसभा या जिले में जाएंगे। इसकी कोई जानकारी अभी तक किसी के पास नहीं है।

कोटपूतली, बहरोड़ और बानसूर में भी होगी राजनीतिक-प्रशासनिक परेशानी
सरकार ने कोटपूतली (जयपुर) और बहरोड़ (अलवर) को एक ही जिला बनाने की घोषणा की है। इसमें बानसूर (अलवर) को शामिल किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में इस इलाके के लाखों लोग भी लोकसभा, विधानसभा, जिला व संभाग मुख्यालय के लिए अलग-अलग कागजात के लिए परेशान होंगे।

अभी कोटपूतली जयपुर ग्रामीण लोकसभा और जिला जयपुर में आता है और बहरोड़ अलवर लोकसभा व अलवर जिले में आता है, जबकि बानसूर अभी तो अलवर जिले में है, लेकिन वो जयपुर ग्रामीण लोकसभा का इलाका है। अब जिला बनने पर बानसूर की लोकसभा क्षेत्र का क्या होगा ? क्या वो कोटपूतली के साथ जयपुर ग्रामीण में रहेगा या बहरोड़ जिले के साथ अलवर में शामिल होगा ? इन सवालों का फिलहाल किसी के पास कोई जवाब नहीं है।

नावां विधानसभा क्षेत्र लेकिन जिला बने कुचामन-डीडवाना

नागौर जिले के नावां कस्बे को जिला नहीं बनाया गया है, जबकि वो विधानसभा क्षेत्र है। कुचामन को जिला बनाया गया है, जबकि वो विधानसभा क्षेत्र ही नहीं है। अभी तक नावां में ही आता है। कुचामन के साथ ज्वाइंट जिला डीडवाना को बनाया गया है। डीडवाना एक अलग विधानसभा क्षेत्र है। तीनों का लोकसभा क्षेत्र नागौर आता है।

ब्यावर फंस गया तीन अलग-अलग क्षेत्रों में
ब्यावर (अजमेर) को एक अलग जिला बना दिया गया है। ब्यावर राजसमंद लोकसभा क्षेत्र में आता है। अब खुद जिला बनेगा। संभाग मुख्यालय राजसमंद के हिसाब से उदयपुर होगा या फिर मौजूदा अजमेर होगा यह अभी तय ही नहीं है। ब्यावर जिले में कौन-कौन सी तहसीलें या विधानसभा क्षेत्र को रखा जाएगा यह भी अभी तय नहीं।

एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को राजस्व विभाग में विशेष टीम बनानी चाहिए और जिलों में कैसे क्या होगा….

कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी और राजस्व मामलों के जानकार एडवोकेट राजेश टंडन का कहना है कि जिलों के सीमांकन व आधार कार्ड सहित अनेक प्रभावित होने वाले दस्तावेजों के बारे में जानकारी देने के लिए राज्य सरकार को जल्द ही विज्ञापन-प्रचार शुरू करने चाहिए, ताकि लोगों के बीच कहीं कोई असमंजस की स्थिति न रहे। साथ ही लोगों की क्षेत्रीय भाषा, पुलिस क्षेत्राधिकार, न्यायिक क्षेत्राधिकार, तहसील कार्यक्षेत्र, जिला कलेक्ट्रेट आदि का निर्धारण जल्द करना चाहिए।

राजस्थान से कांग्रेस एआईसीसी (दिल्ली) सदस्य और प्रदेश कांग्रेस के रिसर्च विभाग के अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने आम जन को सरकारी कार्यों में राहत देने और प्रशासनिक मशीनरी को दुरुस्त करने के लिए जिले बनाए हैं। लोगों को शुरू में थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन सीएम खुद इसे मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है अगले एक से दो महीनों में सभी जिलों का सीमा निर्धारण हो जाएगा।

राजनीतिक प्रशासनिक टिप्पणीकार वेद माथुर का कहना है कि जिलों में मूल रूप से राजस्व व तहसील संबंधी मामले ही पेचीदा होते हैं। वो सरकार तीन-चार तरह के ऑर्डर जारी करके सुलझा लेगी।

नए जिलों के लिए 2000 करोड़ का बजट, कितना काफी?
मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा में बजट रिप्लाई में 19 नए जिलों और 3 नए संभागों की घोषणा की के साथ नए जिलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 करोड़ रुपए के बजट प्रावधान भी किया था।

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता अनिता भदेल के मुताबिक यह बजट काफी कम है। इससे तो 19 नए जिलों में एसपी-कलेक्टर के दफ्तर ही बन जाएं तो बहुत हैं। नए जिलों में जिला स्तर के 8-10 कार्यालय, पुलिस लाइन, सरकारी आवास, वाहन, कर्मचारियों आदि के वेतन पर जो खर्च होगा उसकी राशि 10 गुणा ज्यादा होनी चाहिए। सरकार को बजट बढ़ाना चाहिए।

यह बनाए गए हैं 19 जिले

  • जयपुर से जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, दूदू व कोटपूतली
  • अजमेर से केकड़ी व ब्यावर
  • भीलवाड़ा से शाहपुरा
  • जोधपुर से फलौदी
  • बाड़मेर से बालोतरा
  • अलवर से बहरोड़ व खैरथल
  • श्रीगंगानगर से अनूपगढ़
  • भरतपुर से डीग
  • नागौर से कुचामन-डीडवाना
  • सीकर से नीमकाथाना
  • उदयपुर से सलूम्बर
  • सवाई माधोपुर से गंगापुर सिटी
  • जालोर से सांचौर